डील को लेकर बड़ी खबर: अमेरिका टेक्सटाइल पर ‘0’ टैरिफ लगा सकता है, पीयूष गोयल ने दिया बड़ा संकेत
डील को लेकर बड़ी खबर: अमेरिका टेक्सटाइल पर ‘0’ टैरिफ लगा सकता है, पीयूष गोयल ने दिया बड़ा संकेत
नई दिल्ली: भारत-अमेरिका ट्रेड डील में भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते में भारतीय अपैरल और टेक्सटाइल एक्सपोर्ट्स को जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ (शून्य जवाबी शुल्क) का लाभ मिल सकता है, बशर्ते कपड़े अमेरिकी मूल की कपास (US-origin cotton) से बनाए जाएं।
यह बयान हाल ही में अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड अरेंजमेंट के बाद आया है, जहां बांग्लादेश को अमेरिकी कॉटन और सिंथेटिक फाइबर से बने गारमेंट्स पर जीरो टैरिफ की सुविधा मिली थी। इससे भारतीय टेक्सटाइल उद्योग में चिंता बढ़ गई थी कि बांग्लादेश को ज्यादा फायदा होगा। गोयल ने लोकसभा में राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, “राहुल गांधी ने संसद में एक और झूठ बोला कि बांग्लादेश को भारत से ज्यादा फायदा हुआ। बांग्लादेश की तरह भारत को भी यही सुविधा मिलेगी। अगर अमेरिका से कच्चा माल खरीदा जाए, प्रोसेस किया जाए और एक्सपोर्ट किया जाए, तो जीरो रेसिप्रोकल टैरिफ मिलेगा।”
गोयल ने जोर दिया कि यह क्लॉज अभी इंटरिम फ्रेमवर्क में नहीं है, लेकिन अंतिम समझौते के फाइन प्रिंट में शामिल होगा। अमेरिका ने हाल ही में भारतीय सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया है, और पनिशमेंट ड्यूटी भी हटाई है। टेक्सटाइल सेक्टर के लिए जीरो टैरिफ क्लॉज से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलेगी, खासकर गारमेंट्स और अपैरल में।
मंत्री ने किसानों के हितों की भी रक्षा की बात कही – डील में 90-95% भारतीय कृषि उत्पादों को बाहर रखा गया है, ताकि दालें, अनाज आदि पर कोई असर न पड़े। यह डील मार्च तक फाइनल होने की उम्मीद है, और इससे भारत के एक्सपोर्ट को बूस्ट मिलेगा। टेक्सटाइल इंडस्ट्री, जो भारत का प्रमुख एक्सपोर्ट सेक्टर है, के लिए यह ‘मेगा फायदा’ साबित हो सकता है। गोयल ने कहा, “भारत के हित सुरक्षित हैं, और हमारी कंपनियां अमेरिकी बाजार में मजबूती से उतरेंगी।”
यह खबर भारत-अमेरिका संबंधों में नई मजबूती दिखाती है, जहां ट्रेड बैलेंस सुधार और सेक्टर-स्पेसिफिक लाभ पर फोकस है।
