अमेरिका-कनाडा ब्रिज विवाद क्या है? ट्रंप क्यों बदलना चाहते हैं प्रोजेक्ट परमिट, जानें पूरा मामला
अमेरिका-कनाडा ब्रिज विवाद क्या है? ट्रंप क्यों बदलना चाहते हैं प्रोजेक्ट परमिट, जानें पूरा मामला
वॉशिंगटन/ओटावा, 11 फरवरी 2026: अमेरिका और कनाडा के बीच एक नई ब्रिज को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को धमकी दी है कि वह गॉर्डी हाउ इंटरनेशनल ब्रिज (Gordie Howe International Bridge) को खुलने से रोक देंगे, जब तक अमेरिका को “पूर्ण मुआवजा” नहीं मिलता और कनाडा अमेरिका के साथ “निष्पक्षता और सम्मान” से व्यवहार नहीं करता। व्हाइट हाउस ने कहा है कि ट्रंप के पास इस ब्रिज के प्रोजेक्ट परमिट में संशोधन करने का पूरा अधिकार है। यह विवाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और USMCA ट्रेड डील की पुन: बातचीत से जुड़ा है। आइए जानते हैं पूरा मामला।
ब्रिज क्या है और क्यों महत्वपूर्ण?
गॉर्डी हाउ ब्रिज: यह ब्रिज अमेरिका के मिशिगन राज्य के डेट्रॉइट और कनाडा के ओंटारियो प्रांत के विंडसर को जोड़ता है। यह उत्तरी अमेरिका का सबसे व्यस्त व्यापारिक गलियारा है, जहां से सालाना 200 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है।
निर्माण और लागत: ब्रिज का निर्माण 2018 में शुरू हुआ और 2025 में पूरा होने वाला था। कुल लागत करीब 5.7 बिलियन कनाडियन डॉलर (करीब 4.2 बिलियन USD) है, जिसका पूरा खर्च कनाडा सरकार ने उठाया है। ब्रिज का नाम हॉकी लीजेंड गॉर्डी हाउ के नाम पर रखा गया है।
उद्देश्य: यह ब्रिज पुरानी एम्बेसडर ब्रिज (निजी स्वामित्व वाली) का विकल्प है, जो ट्रैफिक जाम और देरी की समस्या से जूझ रही है। नया ब्रिज 6 लेन का है, जो ट्रक, कार और पैदल यात्रियों के लिए सुविधा देगा।
यह ब्रिज दोनों देशों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है—यह ऑटो इंडस्ट्री, कृषि और अन्य व्यापार को बूस्ट देगा। लेकिन ट्रंप इसे व्यापारिक दबाव बनाने का हथियार बना रहे हैं।
ट्रंप की धमकी और विवाद की शुरुआत
ट्रंप का सोशल मीडिया पोस्ट: 9 फरवरी को ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर लिखा, “मैं इस ब्रिज को तब तक नहीं खुलने दूंगा जब तक अमेरिका को सब कुछ का पूरा मुआवजा नहीं मिलता और कनाडा अमेरिका के साथ निष्पक्षता और सम्मान से व्यवहार नहीं करता।” उन्होंने दावा किया कि ब्रिज अमेरिकी सामग्री के बिना बना है और अमेरिका को कम से कम आधा स्वामित्व मिलना चाहिए।
शेयरिंग ऑफ अथॉरिटी: व्हाइट हाउस ने कहा कि कनाडा को ब्रिज के “स्वामित्व और नियंत्रण” में अमेरिका को हिस्सा देना चाहिए। ट्रंप ने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से फोन पर “स्पष्ट और सीधा” बात की और मांग की।
परमिट संशोधन की धमकी: सभी अंतरराष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की मंजूरी (प्रेसिडेंशियल परमिट) जरूरी होती है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा, “ट्रंप के पास इस परमिट में संशोधन करने का पूर्ण अधिकार है।” अगर ट्रंप परमिट बदलते हैं, तो ब्रिज का खुलना रुक सकता है या शर्तें बदल सकती हैं।
ट्रेड डील से जुड़ाव: यह विवाद USMCA (यूएस-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट) की पुन: बातचीत से जुड़ा है, जो 2026 में होनी है। ट्रंप कनाडा से डेयरी टैरिफ हटाने, ऊर्जा और अन्य मुद्दों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “कनाडा हमें धोखा दे रहा है।”
कनाडा की प्रतिक्रिया
कनाडाई PM मार्क कार्नी ने कहा कि ब्रिज पूरी तरह कनाडाई फंडिंग से बना है और अमेरिका को इसमें कोई अधिकार नहीं। उन्होंने ट्रंप से बात की और “डिटेंटे” (तनाव कम करने) की उम्मीद जताई, लेकिन व्हाइट हाउस की धमकी से विवाद बढ़ गया।
कनाडाई अधिकारियों ने इसे “अनुचित” बताया और कहा कि ब्रिज दोनों देशों के हित में है। विपक्षी पार्टियों ने ट्रंप को “धमकाने वाला” कहा।
ब्रिज अथॉरिटी ने स्पष्ट किया कि निर्माण पूरा हो चुका है और खुलने की तारीख तय है, लेकिन अमेरिकी परमिट में बदलाव से देरी हो सकती है।
मिशिगन और अमेरिकी पक्ष की राय
मिशिगन में इस ब्रिज को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग ट्रंप की धमकी का समर्थन कर रहे हैं, कहते हैं कि अमेरिका को फायदा मिलना चाहिए। लेकिन व्यापारी और स्थानीय नेता चिंतित हैं कि देरी से अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
पुरानी एम्बेसडर ब्रिज के मालिक (मिलियर्डेयर मैनुअल मोरून) ने नए ब्रिज का विरोध किया था, लेकिन अब निर्माण पूरा है। ट्रंप का स्टैंड पुराने विवादों से जुड़ा लगता है।
क्यों हो रहा है विवाद?
ट्रंप की रणनीति: ट्रंप “अमेरिका फर्स्ट” पॉलिसी के तहत कनाडा पर दबाव बना रहे हैं। वे USMCA में बदलाव चाहते हैं, जैसे कनाडा के डेयरी मार्केट में ज्यादा पहुंच।
स्वामित्व का मुद्दा: ब्रिज का भूमि दोनों तरफ कनाडाई है, जो ट्रंप को “अस्वीकार्य” लगता है।
राजनीतिक लाभ: ट्रंप मिशिगन जैसे स्विंग स्टेट्स में लोकप्रियता बढ़ाने के लिए यह कर रहे हैं, जहां ऑटो इंडस्ट्री महत्वपूर्ण है।
यह विवाद दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित कर सकता है। अगर ट्रंप परमिट बदलते हैं, तो कानूनी लड़ाई हो सकती है। फिलहाल, ब्रिज खुलने की तारीख पर संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेड वॉर का नया मोर्चा बन सकता है। अपडेट्स के लिए बने रहें!
