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AI से बने वीडियो अब नहीं बचेंगे: सरकार ने लाए सख्त नियम, 3 घंटे में हटेगा फेक कंटेंट!

AI से बने वीडियो अब नहीं बचेंगे: सरकार ने लाए सख्त नियम, 3 घंटे में हटेगा फेक कंटेंट!

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर AI-जनरेटेड वीडियो, डीपफेक और फेक कंटेंट की बाढ़ के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Amendment Rules, 2026 को 10 फरवरी 2026 को अधिसूचित किया है, जो 20 फरवरी 2026 से लागू हो जाएगा। इन नए नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब) पर AI से बने या संशोधित कंटेंट पर शिकंजा कस दिया गया है।

मुख्य प्रावधान क्या हैं?

सिंथेटिक कंटेंट (SGI) की परिभाषा: AI, एल्गोरिदम या कंप्यूटेशनल प्रोसेस से जेनरेटेड, मॉडिफाइड या अल्टर्ड कोई भी जानकारी (वीडियो, ऑडियो, इमेज) जो असली लगे, अब “सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन” कहलाएगी। इसमें डीपफेक, फेक न्यूज वीडियो सब शामिल।

अनिवार्य लेबलिंग: प्लेटफॉर्म्स को AI-जनरेटेड कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना होगा। विजुअल कंटेंट में लेबल कम से कम 10% स्क्रीन एरिया कवर करेगा, ऑडियो में शुरुआती 10% समय तक श्रव्य होगा। साथ ही परमानेंट मेटाडेटा/वाटरमार्क एम्बेड करना अनिवार्य, जिसे हटाया नहीं जा सकेगा।

यूजर डिक्लेरेशन: कंटेंट अपलोड करने से पहले यूजर को घोषणा करनी होगी कि यह AI-जनरेटेड है या नहीं।

तेज कार्रवाई का समय सीमा: कुछ मामलों में (खासकर गंभीर उल्लंघन या सरकारी आदेश पर) प्लेटफॉर्म्स को फेक/हानिकारक कंटेंट हटाने के लिए समय सीमा घटाकर 3 घंटे कर दी गई है (पहले 36 घंटे थी)। अन्य मामलों में 12 घंटे या 7 दिन तक की समय सीमा तय।

प्री-स्क्रीनिंग और टूल्स: महत्वपूर्ण सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज (50 लाख+ यूजर्स वाले) को ऑटोमेटेड टूल्स से सिंथेटिक कंटेंट डिटेक्ट और फ्लैग करना होगा। यूजर ग्रिवांस पर भी तुरंत एक्शन।

सेफ हैरबर प्रोटेक्शन: अच्छे विश्वास में फेक कंटेंट हटाने पर प्लेटफॉर्म्स को IT एक्ट की धारा 79 के तहत सुरक्षा मिलेगी।

क्यों लाए गए ये नियम?

सोशल मीडिया पर डीपफेक वीडियो से व्यक्तिगत प्रतिष्ठा, चुनावों में हेरफेर, मिसइंफॉर्मेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बढ़ रहा है। पहले से ही MeitY ने कई एडवाइजरी जारी की थीं, लेकिन अब नियम बाइंडिंग हो गए हैं। यह कदम EU, चीन और कैलिफोर्निया जैसे देशों के समान है, जहां AI कंटेंट पर सख्त लेबलिंग और रेगुलेशन हैं।

प्लेटफॉर्म्स पर असर

मेटा, गूगल, एक्स जैसी कंपनियों को अब ज्यादा जिम्मेदारी लेनी होगी। उल्लंघन पर सेफ हैरबर खो सकते हैं, जिससे कानूनी दायित्व बढ़ेगा। क्रिएटर्स को भी AI कंटेंट पर लेबल लगाना पड़ेगा, वरना कंटेंट हटाया जा सकता है।

विवाद और आलोचना

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि नियम बहुत ब्रॉड हैं, जिससे क्रिएटिव AI यूज (आर्ट, पैरोडी) पर भी असर पड़ सकता है और ओवर-सेंसरशिप हो सकती है। लेकिन सरकार का दावा है कि यह यूजर्स की सुरक्षा और डिजिटल ट्रस्ट के लिए जरूरी है।

अब AI से बने वीडियो आसानी से पहचाने जा सकेंगे और फेक कंटेंट तेजी से हटेगा। अगर आप AI टूल्स यूज करते हैं, तो नए नियमों का पालन जरूरी होगा!

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