सत्ता या लोकप्रियता नहीं, राष्ट्र निर्माण के लिए हुआ RSS का गठन! मुंबई में मोहन भागवत ने खोला राज
सत्ता या लोकप्रियता नहीं, राष्ट्र निर्माण के लिए हुआ RSS का गठन! मुंबई में मोहन भागवत ने खोला राज
मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार (7 फरवरी 2026) को मुंबई में “संघ के 100 वर्ष-नए क्षितिज” कार्यक्रम में संघ के गठन पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS का गठन किसी संगठन के साथ प्रतिस्पर्धा, किसी स्थिति की प्रतिक्रिया या किसी के विरोध में नहीं हुआ था। इसका एकमात्र उद्देश्य राष्ट्र निर्माण है।ceab2e
मुख्य बातें जो मोहन भागवत ने कही:
संघ किसी के खिलाफ नहीं: “संघ का गठन किसी दूसरे संगठन के साथ प्रतिस्पर्धा में नहीं हुआ था, न ही इसे किसी खास स्थिति की प्रतिक्रिया के रूप में बनाया गया था और इसने किसी के विरोध में काम नहीं किया है। संघ किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि राष्ट्र के लिए कार्य करता है।”
सत्ता या लोकप्रियता नहीं चाहिए: “संघ लोकप्रियता या सत्ता नहीं चाहता। संघ का काम खुद के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए है। हमारा काम किसी का विरोध किए बिना किया जाता है।”
अनोखा कार्य: संघ कोई अर्धसैनिक संगठन या कुश्ती का अखाड़ा नहीं है। स्वयंसेवक लाठी चलाना सीखते हैं, लेकिन फोकस राष्ट्र निर्माण पर है। दुनिया भर से लोग संघ का काम देखने आते हैं, और यह युवा पीढ़ी के लिए प्रासंगिक है।
कांग्रेस पर टिप्पणी: अंग्रेजों ने कांग्रेस को “सुरक्षा वाल्व” के रूप में बनाया था, लेकिन भारतीयों ने इसे स्वतंत्रता संग्राम का शक्तिशाली साधन बना दिया।
कार्यक्रम में 700-800 लोग शामिल थे, जिसमें उद्योगपति, फिल्मी हस्तियां और अन्य प्रमुख लोग थे। भागवत ने कहा कि संघ की तुलना अन्य संगठनों से करने से गलतफहमियां पैदा होती हैं—संघ भारतीय परंपरा पर आधारित है।
यह भाषण RSS के 100 साल पूरे होने पर नए दृष्टिकोण को रेखांकित करता है। क्या संघ का यह विजन आपको प्रेरित करता है? कमेंट में बताएं!
