उत्तराखंड

पिथौरागढ़ के सीमांत गांव तारागड़ा को मिली बड़ी राहत! विधायक मयूख महर ने भेंट की नाव और लाइफ जैकेट, आपदा से टूटे रास्ते का इंतजार जारी

पिथौरागढ़ के सीमांत गांव तारागड़ा को मिली बड़ी राहत! विधायक मयूख महर ने भेंट की नाव और लाइफ जैकेट, आपदा से टूटे रास्ते का इंतजार जारी

उत्तराखंड के सबसे दूरस्थ सीमांत जिले पिथौरागढ़ के तारागड़ा गांव (लोहाघाट-चंपावत सीमा पर) के ग्रामीणों के लिए बड़ी सुविधा। पिछले साल आपदा में पैदल मार्ग ध्वस्त होने के बाद ग्रामीणों को लोहाघाट बाजार पहुंचने के लिए जान जोखिम में डालकर चट्टानों से गुजरना पड़ रहा था। अब विधायक मयूख महर ने ग्रामीणों की समस्या सुनी और अपने खर्च पर पंचेश्वर नदी पार करने के लिए एक मजबूत नाव भेंट की है।

विधायक ने न केवल नाव दी, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए लाइफ जैकेट भी उपलब्ध कराईं। इससे ग्रामीण अब सुरक्षित तरीके से नदी पार कर लोहाघाट बाजार पहुंच सकेंगे, जहां वे खरीदारी, इलाज, स्कूल और अन्य जरूरी कामों के लिए निर्भर रहते हैं।

मुख्य बातें:

समस्या: विगत वर्ष भारी बारिश और आपदा से तारागड़ा-लोहाघाट पैदल मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त। रास्ता अब तक नहीं बना।

परेशानी: ग्रामीणों को नेपाल सीमा के पास चट्टानों और खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता था, जिससे कई बार हादसे का खतरा रहता था।

विधायक का योगदान: मयूख महर ने ग्रामीणों की शिकायत सुनकर तुरंत नाव तैयार करवाई और खुद पहुंचकर सौंपी। साथ ही लाइफ जैकेट देकर सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा।

गांव की स्थिति: तारागड़ा पंचेश्वर नदी के किनारे बसा है, नेपाल और चंपावत जिले के लोहाघाट से सटा हुआ। बाजार, अस्पताल और अन्य सुविधाएं लोहाघाट पर ही उपलब्ध हैं।

ग्रामीणों ने विधायक का आभार जताया और कहा कि यह नाव उनकी जिंदगी आसान कर देगी। हालांकि, वे अभी भी पैदल मार्ग के पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि लंबे समय तक स्थायी समाधान हो सके।

विधायक मयूख महर का यह कदम सीमांत क्षेत्रों में जनसेवा का बेहतरीन उदाहरण है। क्या ऐसे और भी कई गांव हैं जहां ऐसी छोटी-छोटी मदद से बड़ा बदलाव आ सकता है? कमेंट में बताएं!

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