क्या अब परमाणु युद्ध के मुहाने पर होगी दुनिया… 50 साल में पहली बार खत्म हो रही रूस-अमेरिका की न्यूक्लियर डील!
क्या अब परमाणु युद्ध के मुहाने पर होगी दुनिया… 50 साल में पहली बार खत्म हो रही रूस-अमेरिका की न्यूक्लियर डील!
दुनिया एक बार फिर परमाणु युद्ध के खतरे के करीब पहुंच गई है। रूस और अमेरिका के बीच आखिरी बचे न्यूक्लियर आर्म्स कंट्रोल समझौते न्यू START (New Strategic Arms Reduction Treaty) का आज आखिरी दिन है। कल, 5 फरवरी 2026 को यह संधि औपचारिक रूप से खत्म हो जाएगी—1970 के दशक से चली आ रही आर्म्स कंट्रोल की परंपरा टूट जाएगी। पहली बार आधा सदी से ज्यादा समय में दुनिया के दो सबसे बड़े परमाणु शक्तिशाली देशों के बीच कोई कानूनी सीमा नहीं रहेगी।
न्यू START क्या है?
2010 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने हस्ताक्षर किए थे। 2011 से लागू यह संधि दोनों देशों को 1,550 डिप्लॉयड स्ट्रैटेजिक न्यूक्लियर वारहेड्स (तैयार परमाणु हथियार) और 700 मिसाइल/बॉम्बर तक सीमित रखती है। साथ ही, वेरिफिकेशन (निरीक्षण), डेटा एक्सचेंज और पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। 2021 में इसे 5 साल के लिए बढ़ाया गया था, जो अब खत्म हो रहा है।
क्यों खत्म हो रही है?
फरवरी 2023 में व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस की भागीदारी सस्पेंड कर दी थी। निरीक्षण और डेटा शेयरिंग रुक गई।
अमेरिका ने इसे “अवैध” बताया और जवाबी कदम उठाए।
सितंबर 2025 में पुतिन ने एक साल के लिए अनौपचारिक रूप से सीमाओं का पालन करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोई औपचारिक जवाब नहीं दिया। जनवरी 2026 में ट्रंप ने कहा, “अगर खत्म होती है तो खत्म हो जाएगी… हम बेहतर समझौता करेंगे।”
संधि में सिर्फ एक बार एक्सटेंशन का प्रावधान था, जो इस्तेमाल हो चुका है। नई संधि के लिए बातचीत नहीं हुई।
क्या खतरा है?
दोनों देशों के पास दुनिया के 90% परमाणु हथियार हैं—कई बार पूरी दुनिया नष्ट करने लायक। कोई सीमा नहीं होने से अनियंत्रित हथियार बढ़ोतरी (आर्म्स रेस) हो सकती है।
रूस और अमेरिका पहले से ही नए हथियार विकसित कर रहे हैं—रूस का अवंगार्ड, सर्माट; अमेरिका का मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम।
चीन का तेजी से बढ़ता परमाणु कार्यक्रम भी जटिलता बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि वेरिफिकेशन और डायलॉग के बिना गलतफहमी से परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ेगा। पूर्व रूसी राष्ट्रपति मेदवेदेव ने कहा, “यह ‘डूम्सडे क्लॉक’ को तेज करेगा।”
अगला क्या?
ट्रंप और पुतिन के बीच नई डील की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल कोई ठोस बातचीत नहीं। ICAN और NTI जैसे संगठन चिंतित हैं कि यह न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी को भी कमजोर कर सकता है। दुनिया के लिए यह बड़ा मोड़ है—परमाणु स्थिरता का आखिरी स्तंभ ढह रहा है।
क्या ट्रंप-पुतिन कोई आखिरी पल समझौता करेंगे? या दुनिया अनियंत्रित परमाणु युग में प्रवेश करेगी? समय बताएगा, लेकिन खतरा अब पहले से ज्यादा साफ है।
