उत्तराखंड डीजीपी दीपम सेठ की सख्ती: लापरवाही बरतने वाले 3 SI निलंबित, लैंड फ्रॉड में सीओ की जांच अनिवार्य, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
उत्तराखंड डीजीपी दीपम सेठ की सख्ती: लापरवाही बरतने वाले 3 SI निलंबित, लैंड फ्रॉड में सीओ की जांच अनिवार्य, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ ने अपराध और कानून-व्यवस्था की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए गंभीर लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। सरदार पटेल भवन में आयोजित बैठक में गढ़वाल-कुमाऊं रेंज के प्रभारी, सभी जनपदों के एसएसपी/एसपी और एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
प्रमुख कार्रवाई और निलंबन
डीजीपी ने हाल की तीन गंभीर घटनाओं में लापरवाही बरतने पर तीन पुलिस उप-निरीक्षकों (SI) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया:
ऋषिकेश (देहरादून) – एक महिला की गोली मारकर हत्या की घटना में एम्स चौकी प्रभारी SI साहिल वशिष्ठ को निलंबित किया गया।
कोतवाली नगर, देहरादून – युवती के जघन्य हत्याकांड में खुड़बुड़ा चौकी प्रभारी SI प्रद्युम्न नेगी को निलंबित किया गया।
भगवानपुर थाना (हरिद्वार) – रविदास जयंती पर दो पक्षों में गोलीबारी और संघर्ष की घटना में हल्का प्रभारी चुड़ियाला SI सूरत शर्मा को निलंबित किया गया।
इन तीनों मामलों की जांच एसपी क्राइम को सौंपी गई है:
देहरादून के दोनों हत्याकांड की जांच एसपी क्राइम श्रीमती विशाखा अशोक भदाणे को।
हरिद्वार गोलीबारी मामले की जांच एसपी क्राइम हरिद्वार जितेंद्र मेहरा को।
डीजीपी ने निर्देश दिए कि इन घटनाओं में अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा बरती गई शिथिलता की जांच 7 दिनों के भीतर पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंपी जाए।
लैंड फ्रॉड मामलों में नई सख्ती
उधम सिंह नगर के सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में भूमि विवाद से जुड़े आरोपों के बाद डीजीपी ने लैंड फ्रॉड के सभी मामलों में नई गाइडलाइंस जारी कीं:
जांच अनिवार्य रूप से क्षेत्राधिकारी (सीओ) स्तर पर समयबद्ध तरीके से होगी।
सीओ को स्पष्ट रूप से बताना होगा कि मामला सिविल है या क्रिमिनल।
उसके बाद ही आगे की वैधानिक कार्रवाई होगी।
सभी लंबित भूमि संबंधी मामलों की पुलिस मुख्यालय से लगातार मॉनिटरिंग होगी।
सिविल मामलों में हस्तक्षेप पर कड़ी चेतावनी
डीजीपी ने स्पष्ट कहा कि पुलिस कर्मी सिविल मामलों (जैसे संपत्ति विवाद, पारिवारिक झगड़े) में अनुचित हस्तक्षेप नहीं करेंगे। ऐसा करने वालों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए डीजीपी दीपम सेठ ने सतर्कता विभाग को निर्देश दिए कि भ्रष्ट आचरण करने वाले पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पुलिस की छवि को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है और इसके खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
बैठक का संदेश
यह बैठक उत्तराखंड पुलिस में अनुशासन, जवाबदेही और जनता के प्रति संवेदनशीलता को मजबूत करने का संकेत है। डीजीपी ने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि महिलाओं के खिलाफ अपराध, गोलीबारी, लैंड फ्रॉड और भ्रष्टाचार जैसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस मुख्यालय ने सभी जनपदों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
