अमेरिका-ईरान तनाव: राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने दिया बातचीत का संकेत, ट्रंप प्रशासन के रुख पर सस्पेंस बरकरार
अमेरिका-ईरान तनाव: राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने दिया बातचीत का संकेत, ट्रंप प्रशासन के रुख पर सस्पेंस बरकरार
तेहरान/वाशिंगटन, 3 फरवरी 2026: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव में एक नया मोड़ आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने वार्ता की संभावना का संकेत देते हुए कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना और ईरान की संप्रभुता का सम्मान शर्त होगी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की ओर से अभी कोई स्पष्ट रुख नहीं आया है, जिससे सस्पेंस बना हुआ है।
राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने मंगलवार को तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा, “ईरान शांति और बातचीत का पक्षधर है। हम अमेरिका के साथ सीधी वार्ता कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपनी आक्रामक नीतियां बदलनी होंगी। प्रतिबंधों को हटाना और हमारे परमाणु कार्यक्रम पर अनुचित दबाव बंद करना जरूरी है। हम अपनी रक्षा क्षमता से कोई समझौता नहीं करेंगे।” पेजेश्कियन ने यह भी जोड़ा कि ईरान क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और मध्य पूर्व में शांति के लिए अमेरिका को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
ईरान की ओर से संकेत
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी पुष्टि की कि तेहरान ने अमेरिका को बातचीत का प्रस्ताव भेजा है। सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से पहुंचाया गया। ईरान ने इसमें इराक, सीरिया और यमन जैसे क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। पेजेश्कियन का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी, लेकिन ट्रंप ने चुनावी वादों में ईरान के साथ डील की बात कही थी।
अमेरिका का रुख: सस्पेंस जारी
ट्रंप प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा, “हम ईरान के बयानों पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन कोई भी वार्ता ईरान की ओर से ठोस कदमों पर निर्भर करेगी।” विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप, जो पहले ईरान परमाणु समझौते से बाहर निकले थे, अब वार्ता से लाभ उठाना चाहते हैं, लेकिन उनके सख्त रुख से असमंजस है। अमेरिका ने ईरान को ‘आतंकवाद का प्रायोजक’ बताते हुए दबाव बनाया हुआ है।
पृष्ठभूमि और प्रभाव
अमेरिका-ईरान तनाव 2018 में ट्रंप के पहले कार्यकाल से चरम पर पहुंचा था, जब उन्होंने ओबामा-कालीन JCPOA समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया। तब से ईरान ने यूरेनियम संवर्धन बढ़ाया और अमेरिकी प्रतिबंधों का जवाब दिया। हाल के महीनों में मध्य पूर्व में इजराइल-हमास युद्ध और हूती विद्रोहियों के हमलों ने तनाव बढ़ाया है।
अगर वार्ता हुई तो यह मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए बड़ा कदम होगा, लेकिन असफल होने पर युद्ध की आशंका बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर यूरोपीय संघ और रूस, इस विकास पर नजर रखे हुए हैं। स्थिति स्पष्ट होने तक सस्पेंस बरकरार है, और दोनों पक्षों के अगले कदम पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं।
