Thursday, September 10, 2026
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अलंकार अग्निहोत्री अब आंदोलन पर उतरेंगे! बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा के बाद कानपुर पहुंचे, UGC नियमों के खिलाफ देशव्यापी मोर्चा खोलने का ऐलान

अलंकार अग्निहोत्री अब आंदोलन पर उतरेंगे! बरेली सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा के बाद कानपुर पहुंचे, UGC नियमों के खिलाफ देशव्यापी मोर्चा खोलने का ऐलान

उत्तर प्रदेश के बरेली में तैनात रहे पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) को अपने पद से इस्तीफा देकर सुर्खियां बटोरी थीं। अब इस्तीफे के बाद वे अपने मूल शहर कानपुर पहुंचे हैं, जहां समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया—नारे लगे “देखो शेर आया!” और लोग नाचते-गाते दिखे। अलंकार ने यहां से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान कर दिया है, जो मुख्य रूप से UGC के नए नियमों (जिन्हें वे “सवर्ण विरोधी” और “ब्राह्मण विरोधी” बता रहे हैं) और प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में होगा।

इस्तीफे और आंदोलन की पूरी कहानी

इस्तीफा कब और क्यों? 26 जनवरी को अलंकार ने ईमेल से राज्यपाल, प्रमुख सचिव (नियुक्ति) और बरेली DM को 5 पेज का विस्तृत त्यागपत्र भेजा। मुख्य कारण:

UGC के नए नियम (2026 रेगुलेशंस) जो सामान्य वर्ग (खासकर ब्राह्मण) छात्रों के अधिकारों को प्रभावित करते हैं और शिक्षा में “जातिवाद” बढ़ा सकते हैं।

माघ मेले में शंकराचार्य के शिष्यों की चोटी पकड़कर मारपीट का आरोप।

सरकार की कार्रवाई: इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया, बल्कि तत्काल निलंबन कर दिया गया। आरोप: अनुशासनहीनता और सरकारी नियमों का उल्लंघन। उन्हें शामली DM ऑफिस से अटैच किया गया, विभागीय जांच के आदेश दिए गए।

आंदोलन का प्लान: कानपुर पहुंचकर अलंकार ने कहा कि यह लड़ाई केंद्र सरकार के खिलाफ है। वे पूरे देश में आंदोलन चलाएंगे, SC-ST कानून वापस लेने का दबाव बनाएंगे, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए UGC नियमों को पूरी तरह रद्द करवाने तक संघर्ष जारी रखेंगे। हाथरस में राष्ट्रीय सवर्ण परिषद के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी यही बात दोहराई।

परिवार का साथ: सिर्फ अलंकार नहीं—उनकी मां और भाभी ने भी नौकरी से इस्तीफा दिया था, आत्मसम्मान और संवैधानिक मूल्यों के लिए। परिवार का कहना है कि यह फैसला किसी संगठन के दबाव में नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास से लिया गया।

क्या होगा आगे?

अलंकार ने जान का खतरा भी जताया है और कोर्ट जाने की बात कही। समर्थक उन्हें “शेर” कह रहे हैं, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं। UGC नियमों पर पहले से ही विवाद चल रहा है, और यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है—कुछ लोग इसे सवर्ण समाज की आवाज बता रहे हैं, जबकि सरकार इसे अनुशासनहीनता मान रही है।

कानपुर में उनका स्वागत देखकर लगता है कि यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है। क्या यह सिविल सर्वेंट्स के लिए नई मिसाल बनेगा? अपडेट्स के लिए नजर बनी रहेगी!

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