गढ़वाल में जैविक खेती को नई ऊंचाई: सांसद अनिल बलूनी ने पीयूष गोयल से की महत्वपूर्ण बैठक, सेब-कीवी को वैश्विक बाजार मिलेगा
गढ़वाल में जैविक खेती को नई ऊंचाई: सांसद अनिल बलूनी ने पीयूष गोयल से की महत्वपूर्ण बैठक, सेब-कीवी को वैश्विक बाजार मिलेगा
गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं भाजपा राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने आज केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक का मुख्य फोकस गढ़वाल क्षेत्र में जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, किसानों की आय दोगुनी करना और स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना रहा।
बैठक में गढ़वाल में Centre of Excellence (CoE) की स्थापना पर गंभीर चर्चा हुई। इस केंद्र के माध्यम से कृषि, बागवानी, जैविक उत्पादन और आधुनिक तकनीकों को प्रोत्साहन मिलेगा। किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन बढ़ाने, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और बाजार से जुड़ने में मदद मिलेगी।
मुख्य बिंदु और सहमति:
विदेशों में प्रमुख स्थानों को चिन्हित कर गढ़वाल के किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, आधुनिक उत्पादन प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
फलों की नई एवं उन्नत किस्मों (सेब, कीवी, माल्टा, आड़ू आदि) के उत्पादन, प्रभावी विपणन और वैश्विक बाजार पहुंच पर विस्तृत चर्चा।
इससे पर्वतीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी, गुणवत्ता युक्त पैदावार बढ़ेगी और किसानों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी।
पीयूष गोयल ने सभी प्रस्तावों पर शीघ्र ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने गढ़वाल के किसानों के प्रति गंभीरता और संवेदनशीलता दिखाई, जिसकी सांसद बलूनी ने सराहना की।
सांसद अनिल बलूनी ने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने गढ़वाल के सभी जिलाधिकारियों के साथ जैविक खेती की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की थी और जिलों से रिपोर्ट मंगाई गई थी। अब केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के मार्गदर्शन और जिलाधिकारियों के सहयोग से क्षेत्र में जैविक खेती को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा, “यह पहल न केवल गढ़वाल के उत्पादों को वैश्विक मंच देगी, बल्कि किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करेगी।”
यह बैठक उत्तराखंड के किसानों के लिए एक बड़ा कदम है, खासकर जब हाल ही में गढ़वाल के सेब UAE में एक्सपोर्ट हो चुके हैं। पीयूष गोयल के साथ यह चर्चा ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित उत्तराखंड’ के लक्ष्य को मजबूत करेगी।
