उत्तराखंड में जल्द शुरू होगी ‘देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना’: 24 मार्च 2026 से लागू, हर परिवार को मिलेगी यूनिक आईडी
उत्तराखंड में जल्द शुरू होगी ‘देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना’: 24 मार्च 2026 से लागू, हर परिवार को मिलेगी यूनिक आईडी
उत्तराखंड सरकार राज्य के सभी निवासी परिवारों की पहचान के लिए ‘देवभूमि परिवार पहचान पत्र योजना’ (Devbhoomi Parivar Pehchan Patra Yojana) को जल्द लागू करने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल के 4 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 24 मार्च 2026 को इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। योजना का एक्ट वर्तमान में अंतिम चरण में है और इसे विधानसभा के आगामी बजट सत्र में पेश करने की तैयारी है।
योजना की पृष्ठभूमि और मंजूरी
उत्तराखंड सरकार ने 2022 में ही हरियाणा की ‘परिवार पहचान पत्र’ (Parivar Pehchan Patra) योजना की तर्ज पर इसकी शुरुआत करने का फैसला लिया था। 12 नवंबर 2025 (कुछ स्रोतों में 13 नवंबर) को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में योजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिली। इसके बाद नियोजन विभाग ने एक्ट तैयार करने का काम शुरू किया। 2024 में विभाग ने योजना के क्रियान्वयन के लिए अलग प्रकोष्ठ गठित किया और NIC (National Informatics Centre) के सहयोग से एक समर्पित पोर्टल भी विकसित किया गया।
उद्देश्य और लाभ
हर परिवार को एक यूनिक फैमिली आईडी (Family ID) दी जाएगी, जिसमें परिवार के सभी सदस्यों का विवरण दर्ज होगा।
राज्य और केंद्र सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं (जैसे राशन, पेंशन, छात्रवृत्ति, आवास आदि) का लाभ पात्र परिवारों तक आसानी से पहुंचेगा।
योजनाओं में फर्जीवाड़ा, डुप्लिकेशन और कुछ परिवारों को बार-बार लाभ मिलने की समस्या पर रोक लगेगी।
डेटाबेस डायनामिक और व्यापक होगा, जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के परिवार शामिल होंगे।
यह सुशासन, पारदर्शिता और प्रोएक्टिव गवर्नेंस को मजबूत करेगा – पेपरलेस और डिजिटल मॉडल पर आधारित।
कैसे लागू होगी योजना?
24 मार्च 2026 को सीएम धामी के कार्यकाल के 4 साल पूरे होने पर विशेष कार्यक्रम में लॉन्च होगा।
पोर्टल तैयार होने के बाद परिवार ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर सकेंगे।
शुरुआत में पायलट आधार पर कुछ जिलों में शुरू हो सकती है, फिर पूरे राज्य में विस्तार।
यह योजना उत्तराखंड को हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों की कतार में लाएगी, जहां परिवार आधारित डेटाबेस से लाभार्थी चयन आसान हो गया है। मुख्यमंत्री धामी ने इसे ‘देवभूमि’ की पहचान मजबूत करने और जनकल्याण को प्रभावी बनाने का माध्यम बताया है।
जल्द ही पोर्टल लाइव होने पर आवेदन प्रक्रिया, दस्तावेज और अन्य विवरण उपलब्ध होंगे। उत्तराखंड के निवासियों के लिए यह एक बड़ा कदम साबित होगा!
