‘कभी गुस्से में देखा मुझे?’—हेट स्पीच रिपोर्ट में टॉप पर आने पर CM धामी का जवाब: ‘देवभूमि की रक्षा हेट नहीं, अगर पहला स्थान है तो ठीक है’
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट में खुद को 2025 में भारत का सबसे ज्यादा हेट स्पीच देने वाला नेता बताए जाने पर कड़ा प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी पर गुस्सा नहीं किया, हेट स्पीच नहीं दी, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति, धार्मिक आस्था और डेमोग्राफी की रक्षा के लिए आवाज उठाई है। अगर इसे हेट स्पीच कहा जा रहा है तो वे इसे “स्वीकार” करते हैं।
यह बयान मंगलवार को देहरादून में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू होने के एक साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में दिया गया। UCC की पहली वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सम्मानित किया और राज्य की सकारात्मक बदलावों पर बात की, लेकिन बीच में ही रिपोर्ट का जिक्र आया।
रिपोर्ट क्या कहती है?
वाशिंगटन डीसी स्थित सेंटर फॉर स्टडी ऑफ ऑर्गेनाइज्ड हेट (CSOH) की इंडिया हेट लैब ने “Report 2025: Hate Speech Events in India” जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार:
2025 में भारत में 1,318 हेट स्पीच इवेंट्स दर्ज किए गए (प्रतिदिन औसतन 3-4 से ज्यादा)।
यह 2024 से 13% और 2023 से 97% अधिक है।
98% मामलों में मुस्लिम (1,156) और ईसाई (162) अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाया गया। ईसाई के खिलाफ 41% वृद्धि।
88% घटनाएं BJP शासित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में हुईं।
राज्यवार: उत्तर प्रदेश (266), महाराष्ट्र (193), मध्य प्रदेश (172), उत्तराखंड (155), दिल्ली (76)।
व्यक्तिगत स्तर पर पुष्कर सिंह धामी 71 स्पीच के साथ सबसे ऊपर, उसके बाद प्रवीण टोगड़िया (46), अश्विनी उपाध्याय (35)।
रिपोर्ट में हेट स्पीच की परिभाषा UN की फ्रेमवर्क पर आधारित है—किसी समूह को धर्म, जाति, नस्ल आदि के आधार पर अपमानित करना, भेदभाव या हिंसा को बढ़ावा देना। CSOH खुद को नॉनप्रॉफिट, नॉनपार्टिसन थिंक टैंक बताता है, जो संगठित नफरत पर रिसर्च करता है।
CM धामी का पूरा बयान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हंसते हुए कहा:
“अमेरिका की कोई संस्था है, मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं जानता, लेकिन सुना है उन्होंने हेट स्पीच में मुझे पहले नंबर पर रखा है। अब सोच रहा हूं कि मैंने कभी किसी के साथ हेट नहीं किया, तो स्पीच कैसे हेट हो सकती है?
कभी आपने मुझे गुस्से में देखा? मैंने किसी पर कभी गुस्सा नहीं किया…अगर गुस्सा आया भी तो अकेले में।
मुझे कहा गया कि आप अतिक्रमण के खिलाफ बोलते हो, थूक जेहाद के खिलाफ बोलते हो। मैंने कहा है कि हम उत्तराखंड की संस्कृति, धार्मिक आस्था से कोई समझौता नहीं करेंगे। हम यहां के माहौल को बदलने नहीं देंगे।
उत्तराखंड की धार्मिक डेमोग्राफी की बात करना हेट स्पीच कैसे हो सकता है? देवभूमि के मूल स्वरूप की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करना हेट स्पीच है क्या? अगर ये हेट स्पीच है तो ठीक है, दीजिए हमें पहला स्थान। आने वाले बच्चों को हम ये सब नहीं देंगे।”
धामी ने मंच से अपने नेताओं से पूछा: “क्या मैंने कभी गुस्सा किया? आपने कभी मुझे गुस्से में देखा?” उन्होंने जोर दिया कि उनकी बातें राज्य की सुरक्षा, जबरन धर्मांतरण, अतिक्रमण और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हैं, नफरत से नहीं।
राजनीतिक-सामाजिक बहस
यह पहली बार है जब किसी विदेशी संस्था ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को इस तरह की सूची में टॉप पर रखा है। उत्तराखंड, जो देवभूमि के रूप में शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक पहचान वाला राज्य है, अब इस रिपोर्ट से जुड़ा है।
विपक्ष और कुछ विश्लेषक इसे राज्य की राजनीति के लिए नुकसानदायक मान रहे हैं।
BJP समर्थक इसे “विदेशी साजिश” या “प्रोपगैंडा” बता रहे हैं।
CSOH ने धामी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे उत्तराखंड में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर नजर रखेंगे और नेताओं को जवाबदेह ठहराएंगे।
रिपोर्ट और धामी का बयान भारत में हेट स्पीच, अल्पसंख्यक सुरक्षा और राजनीतिक भाषण की बहस को और तेज कर रहा है। उत्तराखंड जैसे राज्य में UCC जैसे सुधारों के बीच यह विवाद नई बहस का केंद्र बन गया है।
