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10 दिन धरने के बाद प्रयागराज छोड़ा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, प्रशासन के प्रस्तावों को ठुकराया: क्षमा याचना के बिना नहीं माने

10 दिन धरने के बाद प्रयागराज छोड़ा शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, प्रशासन के प्रस्तावों को ठुकराया—क्षमा याचना के बिना नहीं माने

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज के माघ मेले में 10 दिनों तक चले धरने को समाप्त कर दिया है। मौनी अमावस्या (18 जनवरी) पर पालकी (रथ) में गंगा स्नान से रोके जाने और शिष्यों-बटुकों के साथ कथित मारपीट-धक्का-मुक्की के विरोध में उन्होंने शिविर के बाहर धरना शुरू किया था। अब भारी मन से वे प्रयागराज से लौट रहे हैं, लेकिन प्रशासन के प्रस्तावों को ठुकरा दिया है।

घटना का पूरा विवाद

मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य पालकी में संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन मेला प्रशासन ने ‘नो-व्हीकल जोन’ और सुरक्षा कारणों से रोका। उनके साथ आए 200-300 शिष्यों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें शिष्यों के शिखा पकड़कर पटकने और मारपीट के आरोप लगे। शंकराचार्य ने इसे अपमान बताया और धरना शुरू किया। उन्होंने मांग की कि:

प्रशासन सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगे।

संतों-सन्यासियों के साथ दुर्व्यवहार के लिए माफी।

उन्हें सम्मानपूर्वक स्नान कराया जाए।

प्रशासन के प्रस्ताव क्या थे?

प्रशासन ने विवाद सुलझाने के लिए कई प्रस्ताव रखे:

ससम्मान पालकी में स्नान कराने का ऑफर (पुष्प वर्षा और प्रोटोकॉल के साथ)।

शेष मेला अवधि में सम्मानजनक व्यवहार।

लेकिन इनमें क्षमा याचना या सार्वजनिक माफी का कोई जिक्र नहीं था।

शंकराचार्य ने इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा, “मुझे पुष्प वर्षा या सम्मान नहीं चाहिए, बल्कि बटुकों, संन्यासियों और साधुओं के साथ हुए दुर्व्यवहार पर प्रशासन को सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि लौटने का फैसला लेने के बाद ही प्रशासन का प्रस्ताव आया, लेकिन मूल मुद्दा (माफी) हल नहीं हुआ।

धरने के दौरान क्या हुआ?

10 दिन तक कड़ाके की ठंड में धरना, अनशन जैसी स्थिति (पानी तक छोड़ दिया था)।

स्वास्थ्य बिगड़ा, फीवर आया, लेकिन वे अड़े रहे।

संत समाज में समर्थन: उमा भारती, देवकीनंदन ठाकुर, अनिरुद्धाचार्य, बाबा रामदेव आदि ने प्रशासन की आलोचना की।

विपक्ष (अखिलेश यादव, कांग्रेस) ने सरकार पर हमला बोला।

योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए ‘कालनेमियों’ से सावधान रहने की बात कही।

मेला प्रशासन ने नोटिस जारी किए कि वे ‘शंकराचार्य’ टाइटल का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं (सुप्रीम कोर्ट में केस लंबित)।

अब आगे क्या?

शंकराचार्य ने कहा कि वे भारी मन से लौट रहे हैं, लेकिन न्याय का इंतजार जारी रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि माघ मेला खत्म होने पर वापस प्रयागराज आएंगे और धरना दोहराएंगे। यह विवाद उत्तर प्रदेश की सियासत में गरमा गया है, जहां ब्राह्मण-संघर्ष, UGC नियम और शंकराचार्य अपमान जैसे मुद्दे जुड़ गए हैं।

प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने कहा कि वे नियमों के अनुसार कार्रवाई कर रहे थे, कोई अपमान नहीं हुआ। लेकिन शंकराचार्य अड़े हैं—माफी के बिना कोई समझौता नहीं।

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