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अजित पवार क्रैश: लैंडिंग फेज में खोया नियंत्रण, यही है सबसे बड़ा खतरा

विमान हादसे टेकऑफ (उड़ान भरने) और लैंडिंग (उतारने) के समय सबसे ज्यादा क्यों होते हैं? यह एक स्थापित तथ्य है कि हवाई यात्रा के कुल समय का सिर्फ 2-5% हिस्सा ही इन दो चरणों में बीतता है, लेकिन वैश्विक आंकड़ों के अनुसार 50% से ज्यादा हादसे (और कई मामलों में घातक हादसे) इन्हीं चरणों में होते हैं।

मुख्य कारण क्या हैं?

विमान इन चरणों में “low and slow” स्थिति में होता है—यानी कम ऊंचाई पर और कम गति से। इससे पायलट को सुधारने के लिए समय और ऊंचाई बहुत कम मिलती है। क्रूज (मध्य उड़ान) में 30,000-35,000 फीट की ऊंचाई पर गलती होने पर भी सुधार का मौका होता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं।

यहां प्रमुख कारणों की सूची है:

कम ऊंचाई और समय की कमी

कोई समस्या आने पर पायलट के पास सुधारने के लिए कुछ सेकंड या मिनट ही होते हैं। क्रैश होने पर प्रभाव ज्यादा घातक होता है क्योंकि जमीन करीब है।

विमान की कॉन्फ़िगरेशन में लगातार बदलाव

टेकऑफ: फ्लैप्स, लैंडिंग गियर, इंजन पावर, स्पीड बढ़ाना।

लैंडिंग: फ्लैप्स नीचे, गियर नीचे, स्पीड कम करना, एप्रोच एंगल बनाए रखना।

इन बदलावों में छोटी गलती (जैसे स्पीड बहुत कम/ज्यादा) स्टॉल (हवा में रुक जाना) या कंट्रोल खोने का कारण बन सकती है।

पर्यावरणीय कारक ज्यादा प्रभावी

क्रॉसविंड, टर्बुलेंस, फॉग, बारिश, बर्फ—ये निचली ऊंचाई पर ज्यादा असर डालते हैं।

विंडशीयर (हवा की दिशा/गति में अचानक बदलाव) लैंडिंग में खासकर खतरनाक।

मानवीय गलती (Human Error)

ज्यादातर हादसे (80% तक) पायलट या क्रू की गलती से होते हैं।

अनस्टेबल एप्रोच (अस्थिर उतरना)।

गो-अराउंड (दोबारा उड़ान भरना) न करना।

रनवे से बाहर निकलना (overrun/veer-off)।

इंस्ट्रूमेंट पढ़ने में गलती या ATC से कम्युनिकेशन में चूक।

टेक्निकल और बाहरी खतरे

टेकऑफ में: इंजन फेल, बर्ड स्ट्राइक, रनवे डेब्री, टायर फटना।

लैंडिंग में: रनवे स्लिपरी (बारिश/बर्फ से), हार्ड लैंडिंग, गियर फेल।

लैंडिंग में हादसे ज्यादा होते हैं क्योंकि विमान को रोकना (decelerate) उड़ान भरने (accelerate) से कठिन होता है।

आंकड़े क्या कहते हैं?

IATA और Boeing के डेटा (2005-2023/2024 तक): 53% हादसे लैंडिंग फेज में।

टेकऑफ और इनिशियल क्लाइंब: 8-20% हादसे, लेकिन घातक होने की संभावना ज्यादा।

कुल मिलाकर टेकऑफ + लैंडिंग: 50-60% हादसे।

क्रूज फेज (जो उड़ान का 50-60% समय लेता है): सिर्फ 10% से कम हादसे।

अजित पवार के प्लेन क्रैश के संदर्भ में

28 जनवरी 2026 को बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान Learjet 45 (VT-SSK) रनवे से फिसल गया, नियंत्रण खोया और आग लग गई। प्रारंभिक रिपोर्ट्स के अनुसार पायलट ने दूसरी कोशिश (go-around या second approach) की, लेकिन क्रैश हो गया। यह ठीक वैसा ही पैटर्न है—लैंडिंग फेज में रनवे एक्सकर्शन (veer-off), संभवतः क्रॉसविंड, स्पीड कंट्रोल या तकनीकी/मानवीय फैक्टर से। जांच जारी है, लेकिन यह क्लासिक उदाहरण है कि लैंडिंग क्यों सबसे जोखिम भरी है।

हवाई यात्रा आज भी सबसे सुरक्षित है—हर करोड़ों उड़ानों में एक हादसा। लेकिन ये चरण क्रिटिकल रहते हैं, इसलिए पायलट ट्रेनिंग, टेक्नोलॉजी (जैसे GPWS, TCAS) और सख्त नियमों पर फोकस रहता है।

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