Thursday, November 5, 2026
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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की दोहरी नीति बेनकाब की: कहा- ‘पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद से हजारों भारतीयों की मौत, इसे सामान्य नहीं बनाया जा सकता’

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की दोहरी नीति बेनकाब की: कहा- ‘पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद से हजारों भारतीयों की मौत, इसे सामान्य नहीं बनाया जा सकता’

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की खुली बहस में भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर करारा जवाब दिया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पाकिस्तान को आतंकवाद को वैध ठहराने या ‘न्यू नॉर्मल’ बनाने का मंच नहीं बन सकता।

भारत ने स्पष्ट किया कि पिछले कई दशकों में पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकी हमलों में हजारों निर्दोष भारतीय नागरिकों की जान गई है। हरीश ने कहा, “पाकिस्तान ने राज्य नीति के औजार के रूप में आतंकवाद का लगातार इस्तेमाल किया है, और इसे सहना सामान्य नहीं है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में सामान्य या स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

प्रमुख बिंदु भारत के बयान से:

जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है, रहा है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं।

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान-समर्थित आतंकवादियों ने 26 निर्दोष नागरिकों की क्रूर हत्या की, जिसकी निंदा UNSC ने भी की थी।

इसके जवाब में भारत की ऑपरेशन सिंदूर (मई 2025) संयमित, जिम्मेदार और आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई थी, न कि युद्ध विस्तार।

पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि की भावना का उल्लंघन किया है—तीन युद्ध थोपकर और हजारों आतंकी हमलों से। भारत ने इसे निलंबित रखने का फैसला लिया है, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह बंद नहीं करता।

पाकिस्तान का एकमात्र एजेंडा भारत और उसके लोगों को नुकसान पहुंचाना है, जबकि वह झूठे और स्वार्थपूर्ण दावे फैला रहा है।

यह बयान UNSC की ‘रूल ऑफ लॉ’ और अंतरराष्ट्रीय शांति पर बहस के दौरान आया, जहां पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर, सिंधु जल संधि और ऑपरेशन सिंदूर पर भारत पर आरोप लगाए थे। भारत ने इसे प्रोपेगैंडा करार देते हुए पाकिस्तान की दोहरी नीति को पूरी तरह बेनकाब किया।

यह घटना भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को मजबूती से दर्शाती है, और विपक्षी दलों तथा वैश्विक मंच पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की अडिग स्थिति को रेखांकित करती है।

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