बदरी-केदार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन की पहल का तीर्थ पुरोहितों ने किया जोरदार स्वागत: ‘धामों की पवित्रता और सुरक्षा बनी रहेगी’
बदरी-केदार में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन की पहल का तीर्थ पुरोहितों ने किया जोरदार स्वागत: ‘धामों की पवित्रता और सुरक्षा बनी रहेगी’
उत्तराखंड के चारधामों में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की पहल को तीर्थ पुरोहित समाज ने खुले दिल से स्वागत किया है। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की ओर से लाए जा रहे इस प्रस्ताव पर तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि इससे धामों की धार्मिक पवित्रता, सांस्कृतिक विरासत और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
क्या है पूरा मामला?
BKTC (बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति) ने घोषणा की है कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और समिति के अधीन आने वाले सभी प्रमुख मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाएगा।
प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में पारित किया जाएगा, जिसके बाद यह नियम चारधाम यात्रा से पहले लागू हो जाएगा।
गंगोत्री मंदिर समिति ने पहले ही सर्वसम्मति से फैसला ले लिया है कि गैर-हिंदुओं को गंगोत्री धाम और मुखबा (गंगा जी की शीतकालीन पूजा स्थली) में प्रवेश नहीं मिलेगा।
यमुनोत्री मंदिर समिति ने अभी कोई फैसला नहीं लिया है।
BKTC के अधीन कुल 48-50 मंदिर आते हैं, जहां यह नियम लागू होगा।
BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा:
“धामों को पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि धार्मिक तीर्थ माना जाता है। आदि शंकराचार्य के समय से ही परंपरागत रूप से गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहा है। संविधान भी हमें अपने धार्मिक स्थलों के प्रबंधन का अधिकार देता है। साधु-संतों, तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय निवासियों से सहमति बन चुकी है।”
तीर्थ पुरोहितों का स्वागत
केदारनाथ तीर्थ पुरोहित समाज ने कहा: “यह निर्णय धामों की पवित्रता बनाए रखेगा और सुरक्षा बढ़ाएगा। गैर-हिंदुओं के प्रवेश से कभी-कभी अनुशासनहीनता और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचती है।”
तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि यह कदम देवभूमि उत्तराखंड की धार्मिक अस्मिता की रक्षा करेगा।
हालांकि, सिख, जैन, बौद्ध जैसे सनातन धर्म से जुड़े संप्रदायों पर रोक नहीं लगेगी – नियम मुख्य रूप से अन्य धर्मों (जैसे मुस्लिम, ईसाई) पर लागू होगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा: “यह मंदिर समितियों का मामला है। हम सभी हितधारकों से बात करके फैसला लेंगे। आस्था और परंपराओं को ध्यान में रखा जाएगा।”
विपक्ष (कांग्रेस) ने इसे “भेदभावपूर्ण” बताया, जबकि BJP समर्थक इसे “धार्मिक संरक्षण” का कदम बता रहे हैं।
मौलाना अरशद मदनी (जमीयत उलेमा-ए-हिंद) ने कहा: “भाईचारा ही हमारा रास्ता है, लेकिन धार्मिक स्थलों पर रोक से विवाद बढ़ सकता है।”
यह प्रस्ताव उत्तराखंड में हाल ही में हर की पैड़ी (हरिद्वार) और गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन के बाद आया है। चारधाम यात्रा 2026 से पहले यह नियम लागू होने की संभावना है, जिससे धार्मिक पर्यटन पर असर पड़ सकता है। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं – क्या यह फैसला अंतिम रूप लेगा या विवाद बढ़ेगा?
