राष्ट्रीय

‘अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस से मचा बवाल’: माघ मेला प्राधिकरण का कदम, स्वामी ने जवाबी नोटिस भेजा – जानिए किसने क्या कहा!

‘अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस से मचा बवाल’: माघ मेला प्राधिकरण का कदम, स्वामी ने जवाबी नोटिस भेजा – जानिए किसने क्या कहा!

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में ज्योतिषपीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर विवाद चरम पर है। मौनी अमावस्या (18-19 जनवरी) के स्नान पर्व पर प्रशासन ने उनकी पालकी और शोभायात्रा को रोक दिया, जिससे उनके शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। स्वामी ने धरना शुरू किया और माफी की मांग की। इसके बाद माघ मेला प्राधिकरण ने 19-20 जनवरी को उन्हें नोटिस भेजा, जिसमें ‘शंकराचार्य’ उपाधि के इस्तेमाल पर सवाल उठाया गया। स्वामी ने इसे अपमानजनक बताते हुए जवाबी कानूनी नोटिस भेज दिया। इस मामले ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में खलबली मचा दी है।

क्या है पूरा विवाद?

ट्रिगर: मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी परंपरा के अनुसार पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए गए, लेकिन प्रशासन ने अनुमति न होने और भीड़ के कारण रोक दिया। स्वामी ने इसे अपमान बताया और धरना दिया।

प्रशासन का नोटिस (19-20 जनवरी): माघ मेला प्राधिकरण (उपाध्यक्ष ऋषि राज/दयानंद प्रसाद) ने नोटिस जारी कर पूछा – “सुप्रीम कोर्ट में लंबित सिविल अपील (3010/2020) के बावजूद आप ‘ज्योतिषपीठ शंकराचार्य’ क्यों लिख रहे हैं? शिविर बोर्ड पर यह उपाधि क्यों लगाई? 24 घंटे में स्पष्टीकरण दें।” नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 2022 के स्थगन आदेश का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया कि मामले के निपटारे तक कोई पट्टाभिषेक नहीं हो सकता।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जवाब और काउंटर नोटिस

स्वामी ने 8 पेज का विस्तृत जवाब (अंग्रेजी में) भेजा और प्रशासन को 24 घंटे में नोटिस वापस लेने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा:

नोटिस “अपमानजनक” और “सनातन धर्म के अनुयायियों के विश्वास में हस्तक्षेप” है।

‘शंकराचार्य’ पद परंपरा से मिला है, कोई मुकदमा नहीं।

प्रशासन ने झूठा हलफनामा दिया, सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की।

अगर नोटिस वापस नहीं लिया तो अवमानना याचिका और मानहानि मुकदमा दायर करेंगे।

“हमारी पीठ का अपमान किया गया, प्रशासन को ऐसे सवाल पूछने की हिम्मत कैसे हुई?”

किसने क्या कहा?

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा: “अभूतपूर्व और सभी परंपराओं के खिलाफ। सरकार संतों पर नोटिस भेज रही है? पीएम मोदी हस्तक्षेप करें।” कांग्रेस ने इसे “धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला” बताया।

रामभद्राचार्य जी: कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि उन्होंने प्रशासन के कदम को “उचित” बताया, लेकिन विवादास्पद।

प्रशासन/योगी सरकार: कोई आधिकारिक बयान नहीं, लेकिन मेला प्राधिकरण का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट आदेश का पालन कर रहे हैं।

अन्य: कई संत और हिंदू संगठन स्वामी के समर्थन में हैं, जबकि कुछ इसे “कानूनी प्रक्रिया” बता रहे हैं।

पृष्ठभूमि

यह विवाद पुराना है – ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद पर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को कुछ लोग मान्यता देते हैं, लेकिन कानूनी रूप से विवादित। पिछले साल उन्होंने राहुल गांधी को “हिंदू धर्म से बहिष्कृत” घोषित किया था, जिससे भी चर्चा हुई।

धरना अभी जारी है, स्वामी माफी के बिना आश्रम नहीं लौटेंगे। क्या मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा? क्या लगता है, यह धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा है या कानूनी? कमेंट में बताएं!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *