राजनीति

‘सत्य ट्रांसफर नहीं होता’… संभल हिंसा मामले में जज के तबादले पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला बताया!

‘सत्य ट्रांसफर नहीं होता’… संभल हिंसा मामले में जज के तबादले पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल, न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला बताया!

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में 2024 की हिंसा मामले में एएसपी अनुज चौधरी समेत 15-20 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश देने वाले मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर का अचानक तबादला हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 जनवरी 2026 की रात उन्हें संभल से सुल्तानपुर ट्रांसफर कर दिया, जहां उन्हें CJM के बजाय सिविल जज (सीनियर डिविजन) का पद दिया गया है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक बवाल मच गया है और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे न्यायपालिका पर दबाव का मामला बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा:

“सत्य ट्रांसफर नहीं होता, उसका स्थान अचल है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हनन सीधे-सीधे लोकतंत्र का हनन है।”

उन्होंने आगे कहा कि उम्मीद है सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट इस मामले पर खुद संज्ञान लेंगे। अखिलेश ने योगी सरकार पर इशारों में निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे कदम न्याय व्यवस्था की आजादी को कमजोर करते हैं।

क्या है पूरा मामला?

संभल में 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान हुई हिंसा में कई लोग घायल हुए थे।

घायल युवक आलम के पिता यामीन ने याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया कि तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और कोतवाल अनुज तोमर समेत पुलिसकर्मियों ने बिना उकसावे के फायरिंग की।

CJM विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी 2026 को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अनुज चौधरी (अब एएसपी) सहित 15-22 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया।

पुलिस ने इसे न्यायिक जांच के बाद दोबारा केस न बनाने का तर्क दिया था, लेकिन अदालत ने आदेश दिया।

इसके ठीक बाद 20 जनवरी की रात हाईकोर्ट ने 14 न्यायिक अधिकारियों के तबादले की लिस्ट जारी की, जिसमें विभांशु सुधीर का नाम शामिल था। उन्हें सुल्तानपुर में सिविल जज (सीनियर डिविजन) बनाया गया, जो CJM से कम पद माना जा रहा है।

संभल में अब नए CJM के रूप में सिविल जज आदित्य सिंह की नियुक्ति हुई है।

विवाद क्यों?

प्रशासन इसे सामान्य तबादला प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन समय और परिस्थितियों को देखते हुए वकीलों, विपक्ष और कई संगठनों ने इसे न्यायपालिका पर दबाव बताया है। संभल में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यह मामला संभल हिंसा के बाद से ही संवेदनशील बना हुआ है, जहां पुलिस और प्रशासन पर आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं।

अखिलेश यादव की यह टिप्पणी योगी सरकार के खिलाफ विपक्ष की नई रणनीति का हिस्सा लग रही है। क्या यह मामला हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा? फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है।

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