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उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की मौत के मामले में कुलदीप सेंगर को अदालत से नहीं मिली राहत

उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की मौत के मामले में कुलदीप सेंगर को अदालत से नहीं मिली राहत – दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबन की याचिका खारिज कर दी!

उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत (कस्टोडियल डेथ) के केस में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 जनवरी 2026 को उनकी 10 साल की सजा निलंबित (सस्पेंड) करने की याचिका पूरी तरह खारिज कर दी। अदालत ने साफ कहा कि “राहत देने का कोई आधार नहीं है” और मामला गंभीर अपराध से जुड़ा है, जिसमें अपहरण, मारपीट और हिरासत में मौत जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।

मुख्य फैसला और कारण:

जस्टिस रविंदर दुडेजा की सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद फैसला सुनाया।

कुलदीप सेंगर ने सीआरपीसी की धारा 389 के तहत अपील लंबित रहने तक सजा निलंबित करने की मांग की थी। उन्होंने जेल में खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया था।

लेकिन सीबीआई और पीड़िता पक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया। सीबीआई ने दलील दी कि सेंगर की भूमिका पीड़िता और परिवार को चुप कराने की थी, और यह केस बेहद संवेदनशील है।

अदालत ने कहा कि लंबी कैद (2018 से जेल में) के बावजूद राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि अपील में देरी खुद सेंगर की कई याचिकाओं से हुई है। मुख्य अपील पर जल्द सुनवाई होगी (अगली तारीख 3 फरवरी 2026)।

सेंगर को ₹10 लाख जुर्माना के साथ 10 साल का कठोर कारावास सुनाया गया था (13 मार्च 2020 में ट्रायल कोर्ट द्वारा)। उनके भाई अतुल सिंह सेंगर और 5 अन्य को भी यही सजा हुई थी।

केस की पृष्ठभूमि:

अप्रैल 2018 में पीड़िता के परिवार कोर्ट सुनवाई के लिए उन्नाव गए थे, जहां उनके पिता पर हमला हुआ।

अगले दिन पुलिस ने आर्म्स एक्ट में गिरफ्तार किया (सेंगर के इशारे पर), और 9 अप्रैल 2018 को हिरासत में मौत हो गई (पिटाई से चोटें)।

सीबीआई ने जांच की और सेंगर पर साजिश रचने का आरोप लगाया।

सेंगर पहले से ही उन्नाव बलात्कार केस में उम्रकैद काट रहे हैं (2019 में दोषी ठहराए गए)। दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट ने उसमें सजा सस्पेंड कर जमानत दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को उस आदेश पर रोक लगा दी थी।

इस केस में राहत न मिलने से सेंगर फिलहाल जेल में ही रहेंगे।

रिएक्शन:

पीड़िता के वकील महमूद प्राचा ने कहा कि यह न्याय की जीत है – सेंगर जैसे आरोपी को राहत नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि पीड़िता और परिवार को अभी भी खतरा है।

सीबीआई ने केस की गंभीरता पर जोर दिया।

सेंगर पक्ष ने स्वास्थ्य आधार पर राहत मांगी थी, लेकिन अदालत ने नहीं मानी।

यह फैसला उन्नाव केस की लंबी कानूनी लड़ाई में पीड़िता परिवार के लिए महत्वपूर्ण है। सेंगर की मुख्य अपील अभी लंबित है, लेकिन फिलहाल कोई राहत नहीं। न्याय की प्रक्रिया जारी रहेगी!

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