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गाजा पीस बोर्ड विवाद: ट्रंप की ‘Board of Peace’ से UN को किनारे करने की कोशिश? दुनिया में उठ रहे सवाल!

गाजा पीस बोर्ड विवाद: ट्रंप की ‘Board of Peace’ से UN को किनारे करने की कोशिश? दुनिया में उठ रहे सवाल!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित “Board of Peace” (पीस बोर्ड) अब गाजा युद्ध के बाद की व्यवस्था का केंद्र बन गया है, लेकिन इसकी संरचना और महत्वाकांक्षा पर बड़ा विवाद मचा हुआ है। कई देशों और विशेषज्ञों का आरोप है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) की पारंपरिक भूमिका को कमजोर या पूरी तरह किनारे करने की तैयारी है। ट्रंप ने इसे गाजा में शांति, पुनर्निर्माण और प्रशासन के लिए शुरू किया है, लेकिन इसका चार्टर गाजा का जिक्र तक नहीं करता – बल्कि इसे वैश्विक संघर्षों के लिए एक “नया, तेज और प्रभावी” अंतरराष्ट्रीय शरीर बनाने का दावा किया जा रहा है।

मुख्य विवाद और आरोप:

UN को साइडलाइन करने का डर: बोर्ड का चार्टर UN की “अक्षम” संस्थाओं की आलोचना करता है और ट्रंप को जीवन भर चेयरमैन बनाता है। कई देशों (रूस, चीन सहित) का कहना है कि यह UN सिक्योरिटी काउंसिल की जगह लेने की कोशिश है, जहां अमेरिका ने वीटो से गाजा पर कोई कार्रवाई नहीं होने दी। UNSC रेजोल्यूशन 2803 (नवंबर 2025) ने बोर्ड को गाजा के लिए मंजूरी दी थी, लेकिन अब ट्रंप इसे व्यापक बनाना चाहते हैं।

$1 बिलियन में परमानेंट सीट: ट्रंप ने दुनिया भर के नेताओं को आमंत्रण भेजे हैं – भारत, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, इटली, अर्जेंटीना आदि। $1 बिलियन (लगभग ₹8,300 करोड़) दान देने पर 3 साल की सदस्यता के बजाय स्थायी सदस्यता मिलेगी। कनाडा ने इसे खारिज कर दिया, जबकि कई देश सतर्क हैं।

गाजा में संरचना: बोर्ड के नीचे तीन स्तर:

Board of Peace – ट्रंप चेयरमैन, विश्व नेता सदस्य।

Gaza Executive Board – टोनी ब्लेयर, जेरेड कुश्नर, मार्को रुबियो, तुर्की-कतर के अधिकारी, सिग्रिड काग (UN) आदि शामिल। इजरायल ने कुछ नामों पर आपत्ति जताई।

National Committee for the Administration of Gaza (NCAG) – फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट्स द्वारा प्रशासन, हमास को हटाने के बाद।

इजरायल का विरोध: नेतन्याहू ने कहा कि कुछ सदस्यों (तुर्की, कतर) से बातचीत इजरायल से समन्वय के बिना हुई, जो उनकी नीति के खिलाफ है। इजरायल के फार-राइट मंत्री बोर्ड को “हमास के बाद इजरायल की जिम्मेदारी से भागना” बता रहे हैं।

वैश्विक प्रतिक्रिया: यूरोपीय देश सतर्क हैं – यह UN की जगह “अमेरिका-केंद्रित” व्यवस्था बन सकती है। आलोचक इसे “नया विश्व व्यवस्था” या “ट्रंप का व्यक्तिगत ग्लोबल गवर्नेंस” कह रहे हैं। UN की फंडिंग कटौती और वीटो से पहले ही कमजोर UN को और चुनौती मिल रही है।

ट्रंप का दावा:

यह बोर्ड गाजा में “फेज-2” (सीजफायर के बाद डिसआर्मिंग हमास, पुनर्निर्माण, अंतरराष्ट्रीय फोर्स) का हिस्सा है। ट्रंप का 20-पॉइंट प्लान UNSC से मंजूर हुआ था, लेकिन अब बोर्ड को “ग्लोबल कॉन्फ्लिक्ट सॉल्यूशन” के लिए इस्तेमाल करने की बात है।

गाजा की हकीकत:

सीजफायर के बावजूद सर्दी में तंबू गिर रहे हैं, 80% इमारतें तबाह, लाखों बेघर। बोर्ड का फोकस पुनर्निर्माण पर है, लेकिन फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व कम होने और इजरायल-हमास मुद्दों पर सवाल हैं।

यह विवाद अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के भविष्य पर सवाल उठा रहा है – क्या UN की जगह अमेरिका-लीड “क्लब” आएगा? या यह सिर्फ गाजा के लिए अस्थायी है? जनवरी 2026 में बोर्ड की पहली मीटिंग विश्व आर्थिक फोरम के साइडलाइन पर हो सकती है। दुनिया की नजर ट्रंप के इस “पीस बोर्ड” पर टिकी है!

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