ED की चार्जशीट: अल-फलाह यूनिवर्सिटी चेयरमैन पर अवैध नियुक्ति, फर्जी डॉक्टर और 13 करोड़ के फंड डायवर्शन के गंभीर आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी (जिन्हें जवाद अहमद सिद्दीकी भी कहा जा रहा है) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट पीएमएलए कोर्ट में शुक्रवार को दायर की गई, जिसमें यूनिवर्सिटी में बड़े पैमाने पर नियामकीय धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और फंड डायवर्शन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
चार्जशीट के प्रमुख खुलासे:
फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति और रेड फोर्ट ब्लास्ट (10 नवंबर 2025) के आरोपी की अवैध नियुक्ति: जांच में पाया गया कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के निरीक्षण के दौरान “ऑन-पेपर” दर्जनों डॉक्टर नियुक्त किए गए। इनमें से एक आरोपी डॉक्टर यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था, जो लाल किले के पास हुए कार बम ब्लास्ट में शामिल था। निरीक्षण के समय नकली मरीजों का इंतजाम किया गया और वेबसाइट में फर्जी अपडेट किए गए।
13.10 करोड़ रुपये का विदेशी डायवर्शन: ED ने खुलासा किया कि यूनिवर्सिटी के फंड से परिवार के सदस्यों को विदेश भेजे गए रेमिटेंस में शामिल हैं—पत्नी को 3 करोड़ से ज्यादा और बेटे को 1 करोड़ के करीब। कुल मिलाकर 13.10 करोड़ रुपये का विदेशी हस्तांतरण हुआ।
परिवार की कंपनियों को फंड रूटिंग: अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से परिवार नियंत्रित फर्मों (जैसे आमला एंटरप्राइजेज एलएलपी, करकुन कंस्ट्रक्शन आदि) को 110 करोड़ से ज्यादा रुपये ट्रांसफर किए गए। यूनिवर्सिटी फंड से दिल्ली में जमीन खरीदी गई।
छात्रों को गुमराह करना: NAAC ग्रेड A और UGC 12(B) मान्यता के फर्जी दावों से छात्रों-माता-पिता को धोखा दिया गया, जिससे 2019-2025 के बीच कम से कम 415 करोड़ रुपये की कमाई हुई। कुल प्रोसीड्स ऑफ क्राइम अब 493.24 करोड़ रुपये आंकी गई है।
ED ने यूनिवर्सिटी के 54 एकड़ जमीन (धौज क्षेत्र, फरीदाबाद) सहित कुल 139.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति कुर्क की है, जिसमें मुख्य भवन, विभागीय ब्लॉक और छात्रावास शामिल हैं। ये संपत्तियां “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” के रूप में चिह्नित की गई हैं। सिद्दीकी को 18 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
यह मामला नवंबर 2025 के रेड फोर्ट ब्लास्ट से जुड़ा है, जिसमें यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों और पूर्व छात्रों का लिंक सामने आया था। जांच में पाया गया कि कैंपस को आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया गया, जिसमें भारतीय मुजाहिदीन और विदेशी हैंडलर्स के कनेक्शन शामिल हैं।
सोशल मीडिया और न्यूज पोर्टल्स पर यह खबर तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इसे “शिक्षा के नाम पर बड़ा घोटाला” बता रहे हैं। ED की जांच जारी है, और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। अल-फलाह ग्रुप ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
यह घटना शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, खासकर मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में।
