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शिवकार्तिकेयन की ‘पराशक्ति’ पर गहराया विवाद: इंदिरा गांधी की छवि बिगाड़ने, इतिहास तोड़-मरोड़ने के आरोप; 600+ शोज कैंसिल, बॉक्स ऑफिस धड़ाम

शिवकार्तिकेयन की ‘पराशक्ति’ पर गहराया विवाद: इंदिरा गांधी की छवि बिगाड़ने, इतिहास तोड़-मरोड़ने के आरोप; 600+ शोज कैंसिल, बॉक्स ऑफिस धड़ाम

साउथ सुपरस्टार शिवकार्तिकेयन की नई फिल्म पराशक्ति (Parasakthi) रिलीज के कुछ दिनों में ही बड़े राजनीतिक विवाद में घिर गई है। सुधा कोंगारा द्वारा निर्देशित यह पीरियड ड्रामा 10 जनवरी 2026 को रिलीज हुई थी, लेकिन अब तमिलनाडु यूथ कांग्रेस ने फिल्म पर बैन की मांग कर दी है। आरोप है कि फिल्म में 1965 के हिंदी-विरोधी आंदोलन के दौरान कांग्रेस और पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की छवि गलत तरीके से दिखाई गई है, इतिहास से छेड़छाड़ की गई है और कुछ दृश्य पूरी तरह काल्पनिक हैं।

विवाद की वजह क्या है?

फिल्म 1960 के दशक के तमिलनाडु में हिंदी थोपने के खिलाफ छात्र आंदोलन पर आधारित है। इसमें शिवकार्तिकेयन को इंदिरा गांधी से मिलते और विरोध जताते दिखाया गया है, उसके बाद कुछ सीन में उन्हें नेगेटिव लाइट में पोर्ट्रे किया गया है। तमिलनाडु यूथ कांग्रेस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अरुण भास्कर ने कहा कि “1965 में कांग्रेस सरकार ने कभी पोस्ट ऑफिस फॉर्म्स हिंदी में भरने का आदेश नहीं दिया था—यह पूरी तरह फैब्रिकेटेड है। फिल्म कांग्रेस को बदनाम करने के लिए बनाई गई है।” उन्होंने फिल्म के कुछ सीन हटाने, पब्लिक अपोलॉजी और बैन की मांग की है।

फिल्म में कांग्रेस फ्लैग जलाने जैसे सीन भी विवादास्पद बताए जा रहे हैं। CBFC ने फिल्म को UA सर्टिफिकेट देते हुए 25 कट्स (कुछ डायलॉग म्यूट, विजुअल्स हटाए) लगाए थे। मेकर्स ने डिस्क्लेमर डाला कि कई सीन फिक्शनल हैं।

शिवकार्तिकेयन और टीम का जवाब

शिवकार्तिकेयन ने दिल्ली में पोंगल सेलिब्रेशन के दौरान मीडिया से कहा, “कोई विवाद नहीं है, कोई प्रोपगैंडा नहीं। जो लोग पूरी फिल्म देखते हैं, वे मैसेज समझते हैं और सही तरीके से लेते हैं। फिल्म सिर्फ एंटरटेनमेंट है, राजनीति से दूर रखें।” डायरेक्टर सुधा कोंगारा ने भी सफाई दी कि फिल्म का इरादा भाषा और पहचान पर फोकस है, न कि किसी पार्टी को टारगेट करना।

बॉक्स ऑफिस पर भारी असर

ओपनिंग: पहले दिन ₹12-12.5 करोड़ (अच्छी शुरुआत)।

लेकिन विवाद, मिक्स्ड रिव्यूज (कुछ ने बोरिंग, धीमी कहानी कहा) और प्रभास की ‘द राजा साब’ से कॉम्पिटिशन के कारण गिरावट तेज।

दिन 2-4: कलेक्शन क्रैश—दिन 4 पर ₹0.57 करोड़ तक गिरा।

कुल 4-5 दिनों में भारत में ₹28-30 करोड़ के आसपास।

ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक 600+ शोज कैंसिल हो चुके हैं (खासकर B/C सेंटर्स में)। ब्रेक-ईवन मुश्किल, फिल्म फ्लॉप की ओर।

तमिलनाडु में थोड़ा बेहतर लेकिन ओवरऑल धड़ाम।

अन्य मुद्दे

पहले टाइटल विवाद (विजय एंटनी और पुरानी फिल्म से), सेंसर डिले, थलापति विजय की ‘जन नायकन’ से क्लैश (जो पोस्टपोन हो गई)।

कुछ रिपोर्ट्स में विजय फैंस द्वारा नेगेटिव रिव्यूज और ऑनलाइन ट्रोलिंग का आरोप।

संक्षेप में, ‘पराशक्ति’ का राजनीतिक बैकग्राउंड ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन गया। विवाद बढ़ने से शोज कम, ऑडियंस दूर—शिवकार्तिकेयन की उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है। क्या फिल्म रिकवर कर पाएगी? अभी सस्पेंस बरकरार!

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