लालू का आशीर्वाद मिलते ही तेज प्रताप का दही-चूड़ा भोज सुपरहिट, परिवार में बर्फ पिघली?
पटना, 15 जनवरी 2026 — मकर संक्रांति के पावन अवसर पर तेज प्रताप यादव द्वारा आयोजित “ऐतिहासिक दही-चूड़ा भोज” ने बिहार की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। लंबे समय से परिवार से अलग-थलग चल रहे तेज प्रताप को उनके पिता और RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का आशीर्वाद मिलने से यह भोज सुपरहिट साबित हुआ। लालू यादव ने बीमार होने के बावजूद कार्यक्रम में पहुंचकर बेटे को आशीर्वाद दिया और कहा कि “कोई नाराजगी नहीं है, पूरा आशीर्वाद है।”
तेज प्रताप यादव ने पटना के अपने सरकारी आवास 26 M स्ट्रैंड रोड पर यह भव्य आयोजन किया। इसमें बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा, RLJP प्रमुख पशुपति कुमार पारस, कई मंत्री और अन्य नेता शामिल हुए। तेज प्रताप ने पिता को अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया और कहा, “माता-पिता हमारे लिए भगवान हैं, उनका आशीर्वाद मिलता रहेगा।”
तेजस्वी की अनुपस्थिति ने सवाल खड़े किए
भोज में कई बड़े नेता पहुंचे, लेकिन छोटे भाई और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव तथा मां राबड़ी देवी की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी। तेज प्रताप ने कहा कि “तेजू भैया का भोज सुपरहिट नहीं होगा तो किसका होगा?” उन्होंने RJD को अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल (JJD) में विलय करने का ऑफर भी दिया और दावा किया कि RJD में “जयचंदों” ने कब्जा कर लिया है।
लालू यादव ने मीडिया से कहा कि परिवार साथ रहना चाहिए और वे तेज प्रताप से नाराज नहीं हैं। इस मुलाकात से परिवार में बर्फ पिघलने के संकेत मिले हैं, लेकिन RJD में तेज प्रताप की वापसी पर अभी सस्पेंस बरकरार है।
सियासी मायने
यह भोज सिर्फ पारंपरिक त्योहार नहीं रहा, बल्कि बिहार की सियासत में नए समीकरणों का संकेत देता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि लालू का आशीर्वाद तेज प्रताप की राजनीतिक ताकत बढ़ा सकता है, जबकि तेजस्वी की अनुपस्थिति से भाईचारे पर सवाल उठ रहे हैं। कार्यक्रम की सफलता पर तेज प्रताप ने रात में आतिशबाजी भी की।
संक्षेप में, लालू यादव के आशीर्वाद ने तेज प्रताप के दही-चूड़ा भोज को सफल बना दिया और बिहार की राजनीति में नई शुरुआत का संदेश दिया।
