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ईरान की IRGC: कितनी ताकतवर, क्या अमेरिकी हमले का मुकाबला कर पाएगी?

ईरान की IRGC: कितनी ताकतवर, क्या अमेरिकी हमले का मुकाबला कर पाएगी?

तेहरान, 15 जनवरी 2026 — ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC), जिसे सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की सबसे मजबूत ताकत माना जाता है, मिडिल ईस्ट की सबसे प्रभावशाली पैरामिलिट्री फोर्स बनी हुई है। लेकिन जून 2025 में इजराइल और अमेरिका के साथ हुई 12 दिनों की जंग के बाद इसकी स्थिति में बड़े बदलाव आए हैं। IRGC अब भी मजबूत दिखती है, लेकिन पूर्ण अमेरिकी हमले का सामना करने में उसकी सीमाएं साफ नजर आती हैं।

IRGC सीधे खामेनेई को रिपोर्ट करती है और ईरान की रेगुलर आर्मी (आर्टेश) से अलग, ज्यादा पावरफुल है। इसकी अनुमानित ताकत 1.5 से 1.9 लाख सैनिकों की है, जिसमें ग्राउंड फोर्स, नेवी, एयरोस्पेस फोर्स और कुद्स फोर्स (विदेशी ऑपरेशंस) शामिल हैं। बेसिज मिलिशिया को मिलाकर इसका प्रभाव और बढ़ जाता है।

मिसाइल और ड्रोन ताकत सबसे बड़ी ताकत

IRGC की एयरोस्पेस फोर्स हजारों बैलिस्टिक मिसाइलों को कंट्रोल करती है, जिनमें फतेह, खैबर शेकन, फतह-1 हाइपरसोनिक, शहाब-3 (रेंज 2,000+ किमी) जैसी मिसाइलें शामिल हैं। 2025 की जंग के बाद IRGC ने मिसाइल उत्पादन बढ़ाया है और स्टॉक बढ़ाने का दावा किया है। कमांडर माजिद मूसवी ने हाल ही में कहा कि “हम पीक रेडीनेस पर हैं, डैमेज रिपेयर हो चुका है और उत्पादन पहले से ज्यादा है।” ईरान के पास 3,000 से ज्यादा मिसाइलों का अनुमान है, जो असिमेट्रिक वॉरफेयर (गैर-पारंपरिक) में इस्तेमाल होती हैं।

ड्रोन प्रोग्राम भी मजबूत है, जो प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हूती, इराकी मिलिशिया) को सप्लाई किए जाते हैं।

2025 की जंग ने दिखाई कमजोरियां

जून 2025 में इजराइल-अमेरिका के हमलों में IRGC को भारी नुकसान हुआ। कई टॉप कमांडर (जैसे हुसैन सलामी) मारे गए, मिसाइल फैक्टरियां और न्यूक्लियर साइट्स पर हमले हुए। नए कमांडर मोहम्मद पाकपुर और डिप्टी अहमद वाहिदी की नियुक्ति हुई, लेकिन लीडरशिप में गैप बना हुआ है। एयर डिफेंस (एस-300, बावर-373) कमजोर साबित हुई, जिससे इजराइल को आसानी से हमले करने का मौका मिला।

अमेरिकी हमले का सामना?

विशेषज्ञों (ISW, CFR, रॉयटर्स) के मुताबिक, IRGC सीधे अमेरिकी हमले का मुकाबला नहीं कर सकती। अमेरिका की एयर पावर, प्रिसिजन स्ट्राइक्स (टॉमहॉक, स्टेल्थ बॉम्बर्स) और नेवल सपोर्ट से ईरान की डिफेंस जल्दी ब्रेक हो सकती है। IRGC की असली ताकत असिमेट्रिक रिस्पॉन्स में है — प्रॉक्सी अटैक्स, होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉकेज, गल्फ में ऑयल टारगेट्स पर हमले, या साइबर/मिसाइल बैराज। लेकिन पूर्ण युद्ध में ईरान जल्दी कमजोर पड़ सकता है, खासकर जब घरेलू विरोध (प्रोटेस्ट्स) और इकोनॉमिक क्राइसिस चल रही है।

IRGC का दावा है कि वह किसी भी आक्रमण का “डिसाइसिव” जवाब देगी, लेकिन 2025 की जंग से साबित हुआ कि कन्वेंशनल वॉर में अमेरिका-इजराइल का ऊपरी हाथ रहता है। ईरान अब “सर्वाइवल मोड” में है, जहां रिस्क लेने की बजाय डिटरेंस और प्रॉक्सी पर फोकस है।

संक्षेप में, IRGC खामेनेई की सबसे वफादार और ताकतवर सेना है, लेकिन अमेरिकी हमले का पूरा सामना करने में सक्षम नहीं। उसकी ताकत जवाबी और गैर-पारंपरिक हमलों में छिपी है, जो क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ा सकती है।

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