ईरान पर अमेरिकी हमले की अटकलें तेज: कतर के अल उदैद एयर बेस पर मिलिट्री एक्टिविटी में अचानक उछाल, ट्रंप प्रशासन ने विकल्पों पर ब्रीफिंग ली
ईरान पर अमेरिकी हमले की अटकलें तेज: कतर के अल उदैद एयर बेस पर मिलिट्री एक्टिविटी में अचानक उछाल, ट्रंप प्रशासन ने विकल्पों पर ब्रीफिंग ली
ईरान में जारी बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। कतर के अल उदैद एयर बेस (Al Udeid Air Base) पर अमेरिकी सैन्य गतिविधियां अचानक बढ़ गई हैं, जहां B-52 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर, KC-135 एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर और अन्य भारी विमानों की आवाजाही तेज हो गई है। यह बेस मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है, जो ईरान की सीमा से मात्र 200-300 किमी दूर स्थित है और यहां 10,000+ अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
क्यों बढ़ी एक्टिविटी?
ईरान में दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं (कुछ रिपोर्ट्स में 500+ का आंकड़ा)। प्रदर्शन आर्थिक संकट, महंगाई और सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार चेतावनी दी है कि अगर ईरानी रेजीम प्रदर्शनकारियों पर हिंसा जारी रखता है, तो अमेरिका “हस्तक्षेप” करेगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “अमेरिका मदद के लिए तैयार है।”
11-12 जनवरी को ट्रंप को उनके सलाहकारों (मार्को रुबियो, पीट हेगसेथ, जनरल डैन केन) ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर ब्रीफिंग दी, जिसमें तेहरान में गैर-सैन्य साइट्स और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े ठिकानों पर हमले शामिल हैं। हालांकि, कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि “कोई तत्काल हमले का संकेत नहीं”।
ईरान में इंटरनेट शटडाउन और Starlink पर प्रतिबंध के बीच प्रदर्शन जारी हैं, लेकिन दमन बढ़ गया है।
ईरान की जवाबी चेतावनी
ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने कहा, “अमेरिका अगर हमला करता है, तो इजरायल और क्षेत्र में अमेरिकी बेस, जहाज व सैनिक ‘वैध निशाने’ होंगे। हम सिर्फ प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रहेंगे।”
ईरान ने पहले भी (जून 2025 में अमेरिकी हमलों के बाद) कतर के इसी बेस पर मिसाइल दागी थी, हालांकि तब कोई अमेरिकी हताहत नहीं हुआ।
संभावित हमले का आधार
अल उदैद बेस से ही अमेरिका मध्य पूर्व में ऑपरेशंस चलाता है। बढ़ती एक्टिविटी ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम की पुनर्स्थापना, मिसाइल टेस्ट और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़ी मानी जा रही है। अमेरिका ने ईरान में विरोध को “स्वतंत्रता की लड़ाई” बताया है, जबकि ईरान इसे “अमेरिका-इजरायल द्वारा समर्थित दंगे” कह रहा है।
क्या होगा आगे?
ट्रंप प्रशासन डिप्लोमेसी, साइबर ऑपरेशंस, सैंक्शंस या मिलिट्री स्ट्राइक पर विचार कर रहा है, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ।
ईरान ने अपनी एयर डिफेंस और मिसाइल एक्सरसाइज तेज की हैं।
अमेरिकी वर्चुअल एम्बेसी ने ईरान में अमेरिकी नागरिकों को तुरंत निकलने की चेतावनी दी है।
यह स्थिति बेहद नाजुक है। क्षेत्र में तेल कीमतें और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। दोनों पक्ष डिटरेंस (रोकथाम) की नीति पर हैं, लेकिन कोई गलती भड़क सकती है। अपडेट्स के लिए नजर रखें।
