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लोहड़ी 2026: उत्तर भारत में खुशियों और उमंग का त्योहार, आज मनाई जा रही है धूमधाम से

लोहड़ी 2026: उत्तर भारत में खुशियों और उमंग का त्योहार, आज मनाई जा रही है धूमधाम से

आज मंगलवार को पूरे उत्तर भारत में लोहड़ी का त्योहार बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। यह लोकप्रिय पंजाबी फसल उत्सव मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में मनाया जाता है। लोहड़ी सर्दियों के अंत और लंबे, उज्ज्वल दिनों की शुरुआत का प्रतीक है, साथ ही रबी फसल की कटाई और समृद्धि की खुशी मनाई जाती है।

लोहड़ी क्यों मनाई जाती है?

लोहड़ी मुख्य रूप से सूर्य के उत्तरायण (उत्तर दिशा की ओर बढ़ने) का उत्सव है, जब दिन लंबे होने लगते हैं और सर्दी कमजोर पड़ती है। यह किसानों के लिए नई फसल की कटाई और नई शुरुआत का समय होता है। शाम को होली (बोनफायर) जलाकर अग्नि देव और सूर्य देव को धन्यवाद दिया जाता है। लोग होली के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, लोक गीत गाते हैं, भांगड़ा-गिद्दा नाचते हैं और पारंपरिक मिठाइयाँ बाँटते हैं।

इस त्योहार की एक लोकप्रिय कहानी दुल्ला भट्टी से जुड़ी है, जिन्हें पंजाब का ‘रॉबिन हुड’ कहा जाता है। मुगल सम्राट अकबर के समय में दुल्ला भट्टी एक बहादुर योद्धा थे, जो गरीबों की मदद करते थे। उन्होंने कई लड़कियों को गुलामी से बचाया और उनकी शादियाँ करवाईं। उनमें से दो लड़कियाँ सुंदरी और मुंदरी थीं, जिनकी याद में आज भी लोक गीत “सुंदर मुंदरिये हो!” गाया जाता है। यह गीत दुल्ला भट्टी की बहादुरी और न्याय की भावना को जीवित रखता है।

2026 में लोहड़ी की तारीख और शुभ मुहूर्त

इस साल लोहड़ी 13 जनवरी 2026 (मंगलवार) को मनाई जा रही है, जो मकर संक्रांति (14 जनवरी) से ठीक एक दिन पहले है। लोहड़ी संक्रांति का समय 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे है (द्रिक पंचांग के अनुसार)।

अग्नि प्रज्वलित करने और पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त: शाम 5:43 बजे से रात 7:15 बजे तक (प्रदोष काल)। सूर्यास्त के बाद यह समय सबसे उत्तम माना जाता है।

कई जगहों पर शाम 4:25 से 5:44 बजे या रात के लाभ चौघड़िया (7:25 से 9:06 बजे) तक भी पूजा की जाती है।

इस दौरान होली में तिल, गुड़, मूंगफली, रेवड़ी, पॉपकॉर्न और गजक अर्पित किए जाते हैं। परिक्रमा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि आती है।

उत्सव की परंपराएँ और व्यंजन

शाम को होली जलाकर परिवार और पड़ोसी इकट्ठा होते हैं।

पारंपरिक व्यंजन जैसे मक्की की रोटी-सर्सों का साग, तिल के लड्डू, गजक और रेवड़ी का आनंद लिया जाता है।

नए जोड़े और बच्चे विशेष रूप से आशीर्वाद पाते हैं।

लोक गीत और ढोल की थाप पर नाच-गाना जारी रहता है।

लोहड़ी न केवल फसल की खुशी है, बल्कि एकता, बहादुरी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी है। सभी को लोहड़ी की ढेर सारी शुभकामनाएँ! होली की गर्मी से जीवन में नई रोशनी आए।

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