उत्तराखंड

किसान सुखवंत सिंह सुसाइड केस: प्रशासन के आश्वासन के बाद परिजनों ने किया अंतिम संस्कार, भाई की तहरीर पर 26 लोगों पर मुकदमा दर्ज!

किसान सुखवंत सिंह सुसाइड केस: प्रशासन के आश्वासन के बाद परिजनों ने किया अंतिम संस्कार, भाई की तहरीर पर 26 लोगों पर मुकदमा दर्ज!

उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर में जमीन ठगी से परेशान किसान सुखवंत सिंह (40 वर्ष) की आत्महत्या मामले में परिजनों ने प्रशासन के आश्वासन के बाद अंतिम संस्कार कर दिया। 11 जनवरी 2026 शाम को उनका शव पैतृक गांव पैगा पहुंचा था, जहां परिवार ने तीन मुख्य मांगें रखी थीं — वीडियो को सबूत मानकर मुकदमा, नामजद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, और परिवार को न्याय। प्रशासन ने दो मांगों (पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित करने) पर तुरंत आश्वासन दिया, जिसके बाद परिजन सहमत हुए और अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

मुख्य अपडेट्स

अंतिम संस्कार: प्रशासन के आश्वासन के बाद परिवार ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया। पहले आंदोलन की चेतावनी थी, लेकिन दो मांगों पर सहमति के बाद स्थिति शांत हुई।

मुकदमा दर्ज: मृतक के भाई परविंदर सिंह (तेजा सिंह पुत्र) की तहरीर पर आईटीआई थाना में 26 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप — जमीन हड़पना, धोखाधड़ी, मानसिक उत्पीड़न और फ्रॉड (4 करोड़ रुपये का कथित नुकसान)।

नामजद आरोपी: अमरजीत सिंह, आशीष चौहान, कुलविंदर सिंह उर्फ जस्सी, दिव्या, रविंद्र कौर, लवप्रीत कौर, हरदीप कौर, आशीष की पत्नी, गिरवर सिंह, महीपाल सिंह, शिवेंद्र सिंह, विमल व उसकी पत्नी, देवेंद्र, राजेंद्र, गुरप्रेम सिंह, जगपाल सिंह, जगवीर राय, मनप्रीत कलसी, अमित, मोहित, सुखवंत सिंह पन्नू, वीरपाल सिंह पन्नू, बलवंत सिंह बक्सौरा, बिजेंद्र, पूजा और जहीर।

पुलिस कार्रवाई: एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने लापरवाही पर थानाध्यक्ष कुंदन सिंह रौतेला और उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट को निलंबित किया। पैगा चौकी की पूरी टीम (10 पुलिसकर्मी) को लाइन हाजिर किया गया।

जांच: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए, जांच कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत को सौंपी गई है।

बैकग्राउंड

सुखवंत सिंह ने 10 जनवरी रात हल्द्वानी के काठगोदाम थाना क्षेत्र के गौलापार होटल में खुद को गोली मार ली। मौत से पहले फेसबुक लाइव पर 4 मिनट+ वीडियो बनाया, जिसमें 27 लोगों (प्रॉपर्टी डीलर) और पुलिस पर 4 करोड़ की ठगी, पुलिस द्वारा शिकायत न सुनने और दबाव बनाने के आरोप लगाए। वीडियो वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आया।

परिवार का कहना है कि अगर पुलिस ने समय रहते शिकायत पर कार्रवाई की होती, तो सुखवंत जिंदा होते। अब जांच में वीडियो और सुसाइड नोट मुख्य सबूत हैं।

ये मामला उत्तराखंड में जमीन ठगी, पुलिस लापरवाही और किसानों की पीड़ा को उजागर कर रहा है। जांच के नतीजे आने पर और कार्रवाई संभव है।

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