बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की क्रूर हत्या: पीट-पीटकर और जहर खिलाकर ली गई जान, अल्पसंख्यक समुदाय में दहशत
बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की क्रूर हत्या: पीट-पीटकर और जहर खिलाकर ली गई जान, अल्पसंख्यक समुदाय में दहशत
ढाका/सुनामगंज: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। गुरुवार (9 जनवरी 2026) को सुनामगंज जिले के भंगादोहोर गांव में 19 वर्षीय हिंदू युवक जॉय महापात्रो (Joy Mahapatro/Mohapatra) की बेरहमी से हत्या कर दी गई। परिवार के आरोपों के अनुसार, स्थानीय व्यक्ति अमीरुल इस्लाम ने पहले उसे बुरी तरह पीटा, अपमानित किया और फिर जहर खिलाया, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। यह घटना महज 20 दिनों में दूसरी ऐसी क्रूर हत्या है, जिससे हिंदू समुदाय में भय का माहौल है।
घटना का पूरा विवरण
जॉय पर 500 बांग्लादेशी टका (लगभग 350 रुपये) का छोटा-सा कर्ज था।
परिवार का कहना है कि अमीरुल इस्लाम ने सुबह पैसे मांगे, न मिलने पर मोबाइल फोन छीन लिया।
शाम को जॉय फोन वापस लेने गया, जहां उसे थप्पड़ मारे गए, अपमानित किया गया और जबरन जहर खिलाया गया।
जॉय ने खुद जहर खाया होने की बात कही, लेकिन परिवार इसे पूर्व नियोजित हत्या बता रहा है।
उसे पहले दिराई उपजिला स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां हालत बिगड़ने पर सिलहट एमएजी ओस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किया गया।
शुक्रवार सुबह ICU में उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है, लेकिन अभी तक कोई FIR दर्ज होने या गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई। OC एनामुल हक चौधरी ने कहा कि शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई होगी।
बढ़ती हिंसा का पैटर्न
यह घटना दिसंबर 2025 से जारी अल्पसंख्यक हिंसा की कड़ी है। पिछले 20-25 दिनों में कई हिंदू व्यक्तियों की हत्या हुई, जिसमें:
भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मारना
जिंदा जलाना
गोली मारना
और अब जहर खिलाना
दिसंबर में ही कम से कम 51 अल्पसंख्यक हिंसा की घटनाएं दर्ज हुईं। बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव की तैयारी के बीच यह हिंसा चिंता का विषय बनी हुई है। हिंदू समुदाय के नेता और परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में कार्रवाई धीमी बताई जा रही है।
अल्पसंख्यकों में डर का माहौल
हिंदू परिवार अब घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं। कई जगहों पर पूजा-पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। भारत समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है, जहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी? अंतरिम सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस पर सख्त कदम की उम्मीद बनी हुई है।
