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Grok पर अब बिकिनी वाली तस्वीरें बनाने पर लगा प्रतिबंध, इमेज जनरेशन सिर्फ पेड यूजर्स के लिए

Grok पर अब बिकिनी वाली तस्वीरें बनाने पर लगा प्रतिबंध, इमेज जनरेशन सिर्फ पेड यूजर्स के लिए

नई दिल्ली/लंदन: एलन मस्क की कंपनी xAI के AI चैटबॉट Grok पर पिछले कुछ दिनों से भारी विवाद छाया हुआ था। यूजर्स महिलाओं (और कुछ मामलों में बच्चों) की तस्वीरों को अपलोड कर “put her in a bikini” या “remove clothes” जैसे प्रॉम्प्ट देकर बिना सहमति के सेक्शुअलाइज्ड इमेज जनरेट करवा रहे थे। इस “डिजिटल अनड्रेसिंग” ट्रेंड ने दुनिया भर में आक्रोश पैदा किया, जिसमें ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, भारत समेत कई देशों की सरकारें शामिल हुईं।

अब एक्स को झुकना पड़ा है! 9 जनवरी 2026 को Grok ने घोषणा की कि X प्लेटफॉर्म पर इमेज जनरेशन और एडिटिंग फीचर अब केवल पेड सब्सक्राइबर्स (X Premium यूजर्स) के लिए उपलब्ध होगा। फ्री यूजर्स अब Grok से ऐसी तस्वीरें नहीं बना सकेंगे।

यहां देखिए विवाद के दौरान वायरल हुई कुछ इमेजेस और रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट्स:

क्या हुआ था विवाद?

दिसंबर 2025 के अपडेट के बाद Grok ने कम सख्त गार्डरेल्स के साथ इमेज एडिटिंग शुरू की, जिससे यूजर्स आसानी से किसी भी फोटो को बिकिनी या कम कपड़ों में बदलवा रहे थे।

Reuters की रिपोर्ट में एक 10 मिनट के दौरान ही 102 ऐसे अनुरोध मिले, ज्यादातर युवा महिलाओं को टारगेट किया गया।

कुछ मामलों में बच्चों जैसी इमेजेस सेक्सुअलाइज्ड बनाई गईं, जिसे CSAM (Child Sexual Abuse Material) माना जा रहा है।

ब्रिटेन के PM कीयर स्टार्मर ने X पर बैन की धमकी दी, Ofcom ने जांच शुरू की। भारत सरकार ने भी नोटिस जारी किया और 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया।

कई महिलाओं ने शिकायत की कि उनकी तस्वीरें बिना सहमति के बदली गईं, जिससे उनकी प्राइवेसी और गरिमा को ठेस पहुंची।

अब क्या बदला?

Grok ने कहा: “Image generation and editing are currently limited to paying subscribers.”

फ्री यूजर्स को अब मैसेज मिलेगा कि यह फीचर केवल पेड सब्सक्रिप्शन वाले यूजर्स के लिए है।

हालांकि, Grok के स्टैंडअलोन ऐप और वेबसाइट पर अभी भी फ्री जनरेशन संभव है, लेकिन X पर यह सीमित हो गया।

xAI ने कहा कि गार्डरेल्स को और मजबूत किया जा रहा है, और अवैध कंटेंट बनाने वालों के अकाउंट सस्पेंड किए जा रहे हैं।

क्या यह काफी है?

विवाद के बाद यह कदम उठाया गया है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह “समस्या को पेड सर्विस” बना देना है। ब्रिटेन की सरकार ने इसे “पीड़ितों के लिए अपमानजनक” बताया। भारत में भी MeitY और अन्य एजेंसियां नजर रख रही हैं।

फिलहाल, “बिकिनी ट्रेंड” पर ब्रेक लग गया है, लेकिन AI की जिम्मेदारी और प्राइवेसी का सवाल अभी बरकरार है। क्या आगे और सख्ती होगी? समय बताएगा!

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