अंकिता भंडारी के नाम से जाना जाएगा राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ: उत्तराखंड सरकार ने जारी किया शासनादेश, बेटी को श्रद्धांजलि
अंकिता भंडारी के नाम से जाना जाएगा राजकीय नर्सिंग कॉलेज डोभ: उत्तराखंड सरकार ने जारी किया शासनादेश, बेटी को श्रद्धांजलि
देहरादून, 8 जनवरी 2026: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में राज्य सरकार ने एक भावुक और सम्मानजनक कदम उठाया है। रुद्रप्रयाग जिले के डोभ क्षेत्र में प्रस्तावित राजकीय नर्सिंग कॉलेज को अब अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज के नाम से जाना जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को इस संबंध में शासनादेश (GO) जारी कर दिया है। यह फैसला अंकिता के माता-पिता की भावनाओं और उनकी बेटी को न्याय एवं सम्मान दिलाने की मांग को देखते हुए लिया गया है।
अंकिता भंडारी (19 साल) रिसेप्शनिस्ट थीं और नर्सिंग की पढ़ाई करने का सपना देखती थीं। सितंबर 2022 में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके साथियों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई थी। 2025 में तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा हुई, लेकिन परिवार लगातार वीआईपी एंगल की जांच और बेटी को सम्मान देने की मांग कर रहा था। बुधवार को ही अंकिता के माता-पिता ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने कॉलेज का नाम अंकिता के नाम पर रखने की गुजारिश की थी।
शासनादेश की मुख्य बातें:
डोभ (रुद्रप्रयाग) में बनने वाला नया राजकीय नर्सिंग कॉलेज अब शहीद अंकिता भंडारी राजकीय नर्सिंग कॉलेज कहलाएगा।
कॉलेज का नाम बदलने का प्रस्ताव स्वास्थ्य सचिव आर राजेश कुमार ने मंजूर किया।
आदेश में कहा गया है कि अंकिता की स्मृति में यह सम्मान दिया जा रहा है, ताकि उनकी बहादुरी और सपनों को याद रखा जाए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे “बेटी की स्मृति में सच्ची श्रद्धांजलि” बताया। उन्होंने कहा, “अंकिता ने अपनी इज्जत बचाने के लिए जान दे दी। हम उनकी याद को हमेशा जिंदा रखेंगे। कॉलेज के जरिए हजारों बेटियां नर्सिंग की पढ़ाई करेंगी और अंकिता का नाम अमर रहेगा।”
अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने सरकार का आभार जताया और कहा, “यह हमारे लिए बहुत बड़ा सम्मान है। बेटी का सपना नर्स बनना था, अब उसका नाम कॉलेज में जिंदा रहेगा।” परिवार ने साथ ही CBI जांच की मांग दोहराई, जिस पर CM ने सकारात्मक विचार का आश्वासन दिया।
यह कॉलेज रुद्रप्रयाग जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए बनाया जा रहा है। नाम बदलने से इलाके में अंकिता की बहादुरी की कहानी नई पीढ़ी तक पहुंचेगी। उत्तराखंड सरकार की यह पहल महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति संवेदनशीलता दिखाती है। अंकिता भंडारी की याद अब एक संस्थान के रूप में जीवित रहेगी।
