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तेल की दौलत से संकट की गर्त तक: वेनेजुएला की बर्बादी की अनकही कहानी

तेल की दौलत से संकट की गर्त तक: वेनेजुएला की बर्बादी की अनकही कहानी

काराकास (विशेष संवाददाता): एक समय दुनिया के सबसे अमीर देशों में शुमार वेनेजुएला आज आर्थिक तबाही के कगार पर खड़ा है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले इस देश ने कभी डॉलर की बारिश देखी थी, लेकिन गलत नीतियां, भ्रष्टाचार और तेल पर अत्यधिक निर्भरता ने इसे बर्बाद कर दिया। 2013 से 2025 तक देश की जीडीपी करीब 80% सिकुड़ गई, जो बिना युद्ध के किसी देश की सबसे बड़ी आर्थिक गिरावट है। हाइपरइन्फ्लेशन, भोजन-दवा की कमी और करोड़ों लोगों का पलायन – यह वेनेजुएला की हकीकत बन चुकी है। हाल ही में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने देश के भविष्य पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

तेल की चमक और शुरुआती समृद्धि

1920 के दशक में वेनेजुएला में तेल की खोज ने देश को रातोंरात अमीर बना दिया। 1970 के दशक में तेल संकट के दौरान कीमतें आसमान छूने से यहां डॉलर की बौछार हुई। प्रति व्यक्ति आय लैटिन अमेरिका में सबसे ज्यादा थी। लोग मियामी शॉपिंग करने जाते थे। लेकिन यह समृद्धि सिर्फ तेल पर टिकी थी – कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों को नजरअंदाज कर दिया गया।

1999 में ह्यूगो शावेज सत्ता में आए। उन्होंने ‘बोलीवेरियन क्रांति’ के नाम पर तेल की कमाई को गरीबी उन्मूलन और सब्सिडी पर खर्च किया। शुरू में गरीबी घटी, लेकिन तेल कंपनी PDVSA को राजनीतिक नियुक्तियों से भर दिया गया। रखरखाव और निवेश रुक गया।

संकट की जड़ें: गलत नीतियां और गिरते तेल दाम

2013 में शावेज की मौत के बाद निकोलस मादुरो सत्ता में आए। 2014 में वैश्विक तेल कीमतें गिरने से संकट शुरू हुआ। सरकार ने घाटा भरने के लिए मुद्रा छापी, जिससे 2018 में महंगाई 1,30,000% तक पहुंच गई। मूल्य नियंत्रण, जबरन अधिग्रहण और भ्रष्टाचार ने निजी क्षेत्र को तबाह कर दिया।

तेल उत्पादन 30 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर 10 लाख से भी कम रह गया। अमेरिकी प्रतिबंधों ने तेल निर्यात को और मुश्किल बना दिया। परिणामस्वरूप, अस्पतालों में दवाएं गायब, दुकानों में भोजन की कमी और बिजली-पानी की किल्लत। 70 लाख से ज्यादा लोग देश छोड़ चुके हैं।

मादुरो युग का अंत और नया मोड़

2026 की शुरुआत में अमेरिकी सेना की कार्रवाई में मादुरो दंपति को गिरफ्तार कर लिया गया। अमेरिका अब देश के तेल संसाधनों को नियंत्रित करने की बात कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बुनियादी ढांचा ठीक करने में अरबों डॉलर और सालों लगेंगे। लेकिन अगर निवेश आया तो उत्पादन बढ़ सकता है, जो वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित करेगा।

वेनेजुएला की यह कहानी एक सबक है – प्राकृतिक संसाधनों की दौलत बिना सही प्रबंधन के तबाही लाती है। भ्रष्टाचार और पॉपुलिस्ट नीतियां कितनी खतरनाक हो सकती हैं, यह दुनिया के लिए चेतावनी है। अब देखना यह है कि नया दौर देश को संकट से बाहर निकाल पाएगा या नहीं।

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