हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन? श्री गंगा सभा ने CM धामी से लगाई गुहार, पुराने नियमों का हवाला देकर मांगा सख्ती
हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन? श्री गंगा सभा ने CM धामी से लगाई गुहार, पुराने नियमों का हवाला देकर मांगा सख्ती
देहरादून/हरिद्वार, 06 जनवरी 2026: उत्तराखंड में 2027 के अर्धकुंभ मेले से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। श्री गंगा सभा हरिद्वार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुहार लगाई है कि कुंभ क्षेत्र और सभी गंगा घाटों को गैर-हिंदुओं के लिए प्रतिबंधित घोषित किया जाए। सभा का कहना है कि हरिद्वार की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है।
श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा, “कुंभ मेला क्षेत्र में सभी गंगा घाटों और धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन होनी चाहिए। हर की पैड़ी सहित चुनिंदा घाटों पर पहले से ही यह नियम लागू है, अब इसे पूरे 105 घाटों और कुंभ क्षेत्र तक बढ़ाया जाए।” उन्होंने पुराने म्युनिसिपल नियमों का हवाला देते हुए कहा कि हरिद्वार को मीट-शराब और गैर-हिंदू प्रतिबंधित जोन घोषित किया गया था।
सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हरिद्वार देवभूमि का प्रमुख तीर्थ है। हम इसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे। पुराने कानूनों और प्रावधानों की जांच कर संतों से चर्चा के बाद उचित फैसला लेंगे।” सूत्रों के अनुसार, हरिद्वार-ऋषिकेश को ‘सनातन पवित्र नगरी’ घोषित करने और गैर-हिंदुओं की रात में ठहरने पर रोक लगाने का भी प्रस्ताव है।
यह मांग 1916 के एक समझौते और ब्रिटिश काल के नियमों पर आधारित है, जिसमें हरिद्वार-ऋषिकेश में गैर-हिंदुओं की स्थायी बसावट पर रोक थी। पहले हर की पैड़ी पर मुस्लिम विधायकों के आमंत्रण पर भी विवाद हुआ था, जब गंगा सभा ने विरोध किया था।
विवाद पर कुछ लोग इसे संवैधानिक मानते हैं, तो कुछ इसे भेदभाव बता रहे हैं। हरिद्वार में सालाना 4 करोड़ श्रद्धालु आते हैं, और कुंभ में सुरक्षा-सजावट पर फोकस है। देखना यह है कि सरकार क्या फैसला लेती है!
