उत्तराखंड में वनाग्नि के FSI आंकड़ों पर बवाल: वन विभाग ने भेजा शिकायती पत्र, 94% अलर्ट को बताया झूठा या गैर-वन क्षेत्र से जुड़ा
उत्तराखंड में वनाग्नि के FSI आंकड़ों पर बवाल: वन विभाग ने भेजा शिकायती पत्र, 94% अलर्ट को बताया झूठा या गैर-वन क्षेत्र से जुड़ा
देहरादून: उत्तराखंड के जंगलों में आग की घटनाओं को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की लगातार फजीहत हो रही है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) की रिपोर्ट्स में उत्तराखंड को वनाग्नि के मामलों में टॉप पर दिखाया जाता है, लेकिन अब राज्य वन विभाग ने इन आंकड़ों की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा दिए हैं। विभाग ने FSI को पत्र लिखकर खुलासा किया है कि सर्दियों में जारी किए गए अधिकतर फायर अलर्ट झूठे या गैर-वन क्षेत्रों से जुड़े हैं, जिससे राज्य की छवि खराब हो रही है।
हर साल अप्रैल-जून में वनाग्नि सीजन के दौरान उत्तराखंड सुर्खियों में रहता है। FSI के सैटेलाइट आधारित अलर्ट के आधार पर हजारों घटनाओं की बात कही जाती है, लेकिन वन विभाग का दावा है कि इनमें से ज्यादातर वास्तविक वनाग्नि नहीं होतीं। प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (HoFF) रंजन कुमार मिश्रा के कार्यालय से 31 दिसंबर 2025 को FSI के महानिदेशक को भेजे गए पत्र में इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है। पत्र में कहा गया है कि सर्दियों में करीब 1900 अलर्ट जारी किए गए, लेकिन ये वास्तविक आग की घटनाएं नहीं, बल्कि सैटेलाइट से पता चलने वाले हीट सिग्नल हैं।
ग्राउंड ट्रूथिंग से सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
1 नवंबर से 28 दिसंबर 2025 तक कुल 1050 अलर्ट प्राप्त हुए। मैदानी अमले द्वारा सत्यापन (ग्राउंड ट्रूथिंग) के बाद पता चला:
377 अलर्ट (36%) पूरी तरह झूठे।
130 अलर्ट नियंत्रित आग या फायर ड्रिल से जुड़े।
479 अलर्ट (46%) कृषि अवशेष जलाने या गैर-वन क्षेत्रों (कचरा डंप, आदि) से संबंधित।
केवल 64 अलर्ट (करीब 6%) ही वास्तविक वनाग्नि के थे।
क्षेत्रवार: गढ़वाल में 721 अलर्ट में से 55, कुमाऊं में 230 में से सिर्फ 2, और वन्यजीव क्षेत्रों में 99 में से 7 वास्तविक थे। विभाग ने बताया कि कई बार एक ही घटना से अलर्ट आ जाते हैं, जिससे संख्या कृत्रिम रूप से बढ़ जाती है।
पिछले साल भी यही पैटर्न
2024 में भी FSI के आंकड़ों में सिर्फ 9% घटनाएं वास्तविक पाई गई थीं, जबकि 52% झूठी निकलीं। 5% फायर ड्रिल और 4% कंट्रोल फायर से जुड़े थे। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, “FSI अलर्ट प्रारंभिक संकेतक हैं, लेकिन ग्राउंड वेरिफिकेशन के बिना इन्हें वनाग्नि मानना गलत है। इससे अनावश्यक भ्रम फैलता है।”
विभाग के सुझाव
वन विभाग ने FSI से आग्रह किया है कि वेबसाइट पर ‘Forest Fire Alerts’ की जगह ‘Heat Alerts’ शब्द इस्तेमाल किया जाए। साथ ही, ग्राउंड वेरिफिकेशन के बाद के सत्यापित आंकड़ों को मासिक आधार पर सार्वजनिक किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
यह मामला वनाग्नि प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर करता है। विभाग का कहना है कि वास्तविक घटनाओं पर फोकस कर आम लोगों के सहयोग से आग पर काबू पाया जा सकता है। FSI से जवाब का इंतजार है, लेकिन यह विवाद राज्य की वन नीति और राष्ट्रीय आंकड़ों की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
