उत्तराखंड

अंकिता भंडारी मर्डर केस: वायरल ऑडियो क्लिप पर उत्तराखंड सरकार का स्पष्ट बयान, SIT जांच पर जताया भरोसा, नए तथ्यों पर कार्रवाई का आश्वासन

अंकिता भंडारी मर्डर केस: वायरल ऑडियो क्लिप पर उत्तराखंड सरकार का स्पष्ट बयान, SIT जांच पर जताया भरोसा, नए तथ्यों पर कार्रवाई का आश्वासन

देहरादून: उत्तराखंड की 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की 2022 में हुई हत्या के मामले में हालिया दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल हुई ऑडियो क्लिप से नया विवाद खड़ा हो गया है। इस क्लिप में कथित तौर पर ‘वीआईपी’ की संलिप्तता का जिक्र है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर उत्तराखंड सरकार और पुलिस ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें पुरानी जांच की पारदर्शिता पर जोर देते हुए नए आरोपों की गहन जांच का आश्वासन दिया गया है।

सरकार के अनुसार, अंकिता भंडारी के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना की जानकारी मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई। एक वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूप जांच व ट्रायल के दौरान उन्हें जमानत नहीं मिली। SIT की जांच पर नैनीताल हाईकोर्ट ने भरोसा जताते हुए CBI जांच की याचिका खारिज कर दी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, जहां जांच से संतुष्टि जताई गई और याचिका निरस्त कर दी गई।

SIT की जांच के आधार पर अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। निचली अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद मई 2025 में मुख्य अभियुक्त पुलकित आर्य सहित तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी रही, जिसे सभी स्तर की अदालतों ने सही ठहराया।

हालिया वायरल ऑडियो क्लिप और इससे जुड़े आरोपों पर अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं, जिनकी विधिवत जांच चल रही है। यदि जांच में कोई नए तथ्य या साक्ष्य सामने आएंगे तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान यदि किसी के पास VVIP या किसी अन्य से जुड़े साक्ष्य थे तो उन्हें SIT को सौंपा जा सकता था। पुलिस ने सार्वजनिक अपील भी की थी कि कोई भी जानकारी या साक्ष्य साझा किया जाए।

यह मामला अत्यंत गंभीर है और राज्य सरकार की मंशा है कि इसकी निष्पक्ष, पारदर्शी व पूर्ण जांच हो। कोई तथ्य या साक्ष्य अनदेखा न किया जाए। यदि किसी व्यक्ति के पास कोई अतिरिक्त जानकारी या साक्ष्य है तो वह जांच एजेंसियों से साझा कर सकता है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जांच में कोई कसर न रहे और जो भी तथ्य उजागर हों, उनके आधार पर उचित व सख्त कार्रवाई हो।

यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष नए आरोपों की CBI जांच की मांग कर रहा है। सरकार ने जांच की मजबूती पर भरोसा जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।

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