बांग्लादेश संकट: हिंदुओं के बाद बौद्ध समुदाय भी खतरे में
बांग्लादेश संकट: हिंदुओं के बाद बौद्ध समुदाय भी खतरे में
ढाका, 30 दिसंबर 2025: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद से अल्पसंख्यकों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। मुख्य रूप से हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है, लेकिन अब बौद्ध समुदाय भी चरमपंथी ताकतों के रडार पर आ गया है। हालिया रिपोर्ट्स में चटगांव के राउजान इलाके से एक चौंकाने वाला पोस्टर सामने आया है, जिसमें 13 दिसंबर 2025 को हिंदू और बौद्ध समुदाय के लगभग दो लाख लोगों के नरसंहार की योजना का जिक्र है। पोस्टर में धमकी दी गई है कि इलाके से इन समुदायों का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा।
यह घटना उस समय सामने आई जब देश में इस्लामिस्ट नेता शरीफ ओसमान हादी की मौत के बाद हिंसा भड़की। दिसंबर में हिंदू युवकों दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की लिंचिंग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के अनुसार, अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर 2900 से अधिक हमले दर्ज हुए हैं, जिनमें हत्याएं, आगजनी और जमीन हड़पने की घटनाएं शामिल हैं। भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि हिंदू, बौद्ध व ईसाई समुदायों पर चरमपंथियों का लगातार हमला गंभीर चिंता का विषय है।
बौद्ध समुदाय मुख्य रूप से चटगांव हिल ट्रैक्ट्स में रहता है और ऐतिहासिक रूप से शांतिप्रिय रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में जमीन हड़पने और धमकियों की शिकायतें बढ़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता और चरमपंथी ताकतों के उभार से अल्पसंख्यक असुरक्षित हो गए हैं। अंतरिम सरकार ने हिंसा की निंदा की है, लेकिन प्रभावी कार्रवाई की कमी से आरोप लग रहे हैं कि अपराधी बेखौफ हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय, जिसमें भारत और अमेरिका शामिल हैं, ने बांग्लादेश से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। फरवरी 2026 में होने वाले चुनाव से पहले हिंसा बढ़ने की आशंका है। बांग्लादेश में धार्मिक सहिष्णुता बनाए रखना अब बड़ी चुनौती बन गया है।
