देहरादून में नस्लीय हमले की शिकार त्रिपुरा के छात्र की मौत: 5 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य फरार नेपाल में, CM धामी ने ठोंकी सख्ती
देहरादून में नस्लीय हमले की शिकार त्रिपुरा के छात्र की मौत: 5 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य फरार नेपाल में, CM धामी ने ठोंकी सख्ती
देहरादून, 29 दिसंबर 2025: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नस्लीय टिप्पणियों का विरोध करने पर त्रिपुरा के 24 वर्षीय MBA छात्र एंजेल चकमा की निर्मम हत्या ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया है। 9 दिसंबर को सेलाकुई इलाके में छोटे भाई माइकल के साथ सब्जी खरीदने गए एंजेल पर कुछ युवकों ने ‘चीनी’, ‘मोमो’ और ‘चिंकी’ जैसे नस्लीय टिप्पणियां कीं। एंजेल ने विरोध करते हुए कहा, “हम भारतीय हैं”, लेकिन इसके बाद हमलावरों ने चाकू और कड़े से उन पर ताबड़तोड़ वार किए। एंजेल को गंभीर चोटें आईं – सिर, गर्दन और रीढ़ में गहरे घाव, दिमाग में फ्रैक्चर और शरीर का दाहिना हिस्सा सुन्न हो गया। 17 दिन अस्पताल में जिंदगी-मौत से जूझने के बाद 26 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने मामले में हत्या की धाराएं जोड़ते हुए छह आरोपियों की पहचान की। इनमें से पांच को गिरफ्तार कर लिया गया है – अविनाश नेगी (25), सूरज खवास (22, मणिपुर मूल), सुमित (25), शौर्य राजपूत (नाबालिग) और आयुष बडोनी (नाबालिग)। दो नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया। मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी (नेपाल के कंचनपुर का रहने वाला) फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया और पुलिस टीम नेपाल भेजी गई है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना को ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताते हुए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने एंजेल के पिता तरुण प्रसाद चकमा से फोन पर बात की और कहा, “दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी। फरार आरोपी जल्द पकड़ा जाएगा।” धामी ने त्रिपुरा के CM माणिक साहा से भी बात की और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मामले की जानकारी दी।
त्रिपुरा में शोक और गुस्सा भड़क उठा है। छात्र संगठनों ने प्रदर्शन कर नस्लीय घृणा अपराधों के खिलाफ राष्ट्रीय कानून की मांग की। टिपरा मोथा पार्टी ने फरार आरोपी की जानकारी देने पर 10 लाख का इनाम घोषित किया। परिवार ने पुलिस पर FIR में देरी का आरोप लगाया, लेकिन पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलते ही कार्रवाई शुरू की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर के छात्रों पर होने वाले ऐसे हमले रुकवाने के लिए जागरूकता और सख्त कानून जरूरी हैं। जांच जारी है, न्याय की उम्मीद बंधी है।
