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हिमालय के नीचे भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट फट रही? भूकंप का खतरा बढ़ सकता है

हिमालय के नीचे भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट फट रही? भूकंप का खतरा बढ़ सकता है

नई दिल्ली, 27 दिसंबर 2025: वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च ने दुनिया को चौंका दिया है। हिमालय के नीचे भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट पूरी तरह से नहीं, बल्कि आंशिक रूप से ‘डेलैमिनेशन’ प्रक्रिया से गुजर रही है, यानी प्लेट का निचला घना हिस्सा ऊपरी हिस्से से अलग होकर पृथ्वी के मेंटल में धंस रहा है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से तिब्बत के नीचे हो रही है, जहां भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है।

अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (AGU) की 2023-2025 की स्टडीज में सिस्मिक वेव्स, हेलियम आइसोटोप एनालिसिस और भूकंप डेटा से पता चला कि प्लेट में वर्टिकल टियर (फटाव) बन रहा है। पश्चिमी हिमालय में प्लेट ज्यादातर एकसमान है, लेकिन पूर्वी हिस्से (खासकर 90-92° ईस्ट लॉन्गिट्यूड के आसपास) में डेलैमिनेशन ज्यादा सक्रिय है। यहां प्लेट का निचला हिस्सा अलग होकर 100-200 किमी गहराई तक धंस रहा है, जबकि ऊपरी हिस्सा आगे सरक रहा है। इससे कोना-सांगरी रिफ्ट जैसी सतही दरारें जुड़ी हुई लगती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया हिमालय की ऊंचाई बढ़ाने वाली टक्कर का हिस्सा है, लेकिन यह नई नहीं है—लाखों साल से चल रही है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के जियोफिजिसिस्ट साइमन क्लेम्परर के अनुसार, ऐसे टियर से क्रस्ट में नया स्ट्रेस बन सकता है, जो भूकंप की फ्रीक्वेंसी और तीव्रता बढ़ा सकता है। हिमालय पहले से ही सिस्मिकली एक्टिव जोन है, और यह प्रक्रिया तिब्बत प्लेटो में रिफ्टिंग को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, कुछ वैज्ञानिक जैसे मोनाश यूनिवर्सिटी के फैबियो कैपिटानियो कहते हैं कि अभी डेटा सीमित है और पूरा प्रभाव समझने के लिए और रिसर्च चाहिए।

भारत, नेपाल, भूटान और तिब्बत के लिए इसका मतलब है कि भूकंप रिस्क मॉडल्स को अपडेट करना पड़ेगा। क्या यह बड़े भूकंपों की वजह बनेगा? अभी निश्चित नहीं, लेकिन सतर्कता जरूरी है। वैज्ञानिकों की नजरें अब और डिटेल्ड सिस्मिक स्टडीज पर टिकी हैं।

 

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