चीन का नया हथियार: सिविलियन जहाजों को बनाया मिसाइल युद्धपोत, वैश्विक चिंता बढ़ी
चीन का नया हथियार: सिविलियन जहाजों को बनाया मिसाइल युद्धपोत, वैश्विक चिंता बढ़ी
बीजिंग, 27 दिसंबर 2025: चीन ने एक बार फिर अपनी सैन्य रणनीति से दुनिया को चौंका दिया है। हाल ही में सामने आई तस्वीरों और सैटेलाइट इमेजेस से पता चला है कि चीन ने एक सामान्य कमर्शियल कार्गो शिप को मिसाइलों से लैस युद्धपोत में बदल दिया है। शंघाई के हुदोंग-झोंगहुआ शिपयार्ड में डॉक किए गए कंटेनर शिप ‘झोंगडा 79’ पर मॉड्यूलर कंटेनर जैसे वर्टिकल लॉन्च सिस्टम, रडार और डिफेंसिव इक्विपमेंट लगाए गए हैं, जो इसे 60 तक मिसाइलें दागने में सक्षम बनाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह चीन की ‘मिलिट्री-सिविल फ्यूजन’ स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जिसमें सिविलियन जहाजों को तेजी से सैन्य उपयोग के लिए तैयार किया जाता है। दिसंबर 2025 में सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों से यह साफ है कि ये जहाज सामान्य व्यापारिक रूट्स पर चलते हुए अचानक युद्धक्षमता हासिल कर सकते हैं, जो दुश्मन के लिए पहचानना मुश्किल बनाता है। इससे पहले अगस्त 2025 में हुए जिएशेंग ड्रिल्स में 12 सिविलियन रो-रो फेरीज और कार्गो शिप्स ने बीच लैंडिंग का अभ्यास किया, जिसमें टैंक्स और बख्तरबंद वाहन सीधे समुद्र तट पर उतारे गए।
यह विकास ताइवान पर संभावित हमले की तैयारी से जोड़ा जा रहा है। अमेरिकी और ताइवानी विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) की सीमित एम्फीबियस क्षमता को इन ड्यूल-यूज जहाजों से बढ़ाया जा रहा है, जो लाखों सैनिकों और भारी हथियारों को ताइवान स्ट्रेट पार कराने में मदद कर सकते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे जहाज दुश्मन की प्लानिंग को जटिल बनाते हैं, क्योंकि ये सिविलियन दिखते हुए अचानक हमला कर सकते हैं।
विश्व समुदाय में चिंता बढ़ गई है। अमेरिका और उसके सहयोगी इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मान रहे हैं, क्योंकि सिविलियन जहाजों का सैन्य उपयोग युद्ध नियमों को धुंधला करता है। भारत सहित इंडो-पैसिफिक देशों के लिए यह खतरा बढ़ा रहा है, क्योंकि चीन का जहाज निर्माण उद्योग दुनिया का सबसे बड़ा है और ऐसे हजारों जहाज आसानी से सैन्यीकृत हो सकते हैं।
चीन का दावा है कि ये कदम रक्षा के लिए हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला कदम है। क्या यह युद्ध की तैयारी है? दुनिया की नजरें बीजिंग पर टिकी हैं।
