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रात के अंधेरे में राजस्थान की अरावली में अवैध खनन का खेल: स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप

रात के अंधेरे में राजस्थान की अरावली में अवैध खनन का खेल: स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप

अलवर: राजस्थान के अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों में अवैध खनन का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। स्थानीय लोगों का दावा है कि अंधेरा होते ही अवैध खनन का खेल शुरू हो जाता है। राजगढ़, रामगढ़, तिजारा, बहरोड़, नीमराना सहित करीब 53 इलाकों में रात भर क्रेशर चलते हैं और बिना नंबर प्लेट वाले ओवरलोड डंपर पत्थर, गिट्टी व डस्ट लेकर हरियाणा व एनसीआर की ओर निकल पड़ते हैं। GRAP-4 की सख्त पाबंदियों के बावजूद यह धंधा फल-फूल रहा है।

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि यह सब पुलिस और अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है। कई गांवों के लोग इस धंधे से जुड़े हैं, लेकिन पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है—पहाड़ियां खत्म हो रही हैं, भूजल स्तर गिर रहा है और प्रदूषण बढ़ रहा है। एक स्थानीय ने कहा, “रात में क्रेशरों की आवाज और डंपरों की धमक से नींद उड़ जाती है, लेकिन शिकायत करने पर कोई सुनवाई नहीं।”

यह मामला अरावली संरक्षण के मौजूदा विवाद से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अरावली की नई परिभाषा स्वीकार की और नए खनन पट्टों पर पूरी रोक लगा दी है। केंद्र सरकार का दावा है कि 90% से ज्यादा क्षेत्र संरक्षित रहेगा और अवैध खनन पर सख्ती बढ़ेगी—ड्रोन, सर्विलांस जैसी तकनीक का इस्तेमाल होगा। लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। पिछले 7 सालों में राजस्थान में 7,000 से ज्यादा अवैध खनन की FIR दर्ज हुईं, जिनमें अरावली क्षेत्र का बड़ा हिस्सा है।

विपक्षी कांग्रेस इसे भाजपा सरकार की नाकामी बता रही है, जबकि भाजपा पूर्व कांग्रेस सरकार पर अवैध खनन को संरक्षण देने का आरोप लगा रही है। पर्यावरणविदों की चिंता है कि अगर अवैध खनन नहीं रुका तो अरावली का पर्यावरण पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया है, लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं—कार्रवाई कब होगी? क्या रात का यह खेल कभी थमेगा?

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