कर्नाटक कांग्रेस में संकट अभी थमा नहीं, डीके शिवकुमार की खड़गे से मुलाकात के बाद CM बदलाव की अटकलें फिर तेज
कर्नाटक कांग्रेस में संकट अभी थमा नहीं, डीके शिवकुमार की खड़गे से मुलाकात के बाद CM बदलाव की अटकलें फिर तेज
बेंगलुरु, 25 दिसंबर 2025: कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी का आंतरिक संकट अभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आज बेंगलुरु में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की, जिसके बाद मुख्यमंत्री पद पर बदलाव की अटकलें एक बार फिर जोर पकड़ गई हैं। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल के आधे से ज्यादा समय गुजार चुकी है और सिद्धारमैया बनाम शिवकुमार की खींचतान लंबे समय से चल रही है।
मुलाकात के बाद डीके शिवकुमार ने मीडिया से कहा कि उन्होंने कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं उठाया। उन्होंने बताया कि राज्य कांग्रेस प्रमुख के तौर पर केवल केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह लाए नए कानून पर अपनी राय साझा की, क्योंकि 27 दिसंबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होने वाली है। शिवकुमार ने कहा, “मैंने खड़गे जी से राज्य की राजनीति पर कोई चर्चा नहीं की। कोई जरूरत नहीं है। सिद्धारमैया और मैं हाईकमान के फैसले का पालन करेंगे।”
हालांकि, इस मुलाकात को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज है। कुछ दिन पहले ही खड़गे ने कहा था कि कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर भ्रम केवल स्थानीय स्तर पर है, हाईकमान में नहीं। उन्होंने स्थानीय नेताओं से खुद जिम्मेदारी लेने की सलाह दी थी। इसके बावजूद शिवकुमार की यह मुलाकात CM बदलाव की संभावना को हवा दे रही है।
संकट की जड़ क्या है?
2023 चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद सिद्धारमैया को CM और शिवकुमार को डिप्टी CM बनाया गया था।
शिवकुमार गुट का दावा है कि ढाई साल बाद CM पद रोटेशन का ‘गुप्त समझौता’ था, जो अब पूरा होने का समय है।
सिद्धारमैया गुट इसे खारिज करता है और कहता है कि 5 साल का जनादेश उन्हें मिला है।
नवंबर में शिवकुमार समर्थक विधायक दिल्ली जाकर हाईकमान से मिले, लेकिन कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।
खड़गे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने कई बार हस्तक्षेप के संकेत दिए, लेकिन संकट बरकरार है।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान अभी इंतजार की रणनीति पर है और जल्द कोई बड़ा फैसला (जैसे कैबिनेट फेरबदल या संगठन में बदलाव) ले सकता है। दोनों नेता सार्वजनिक रूप से एकता दिखा रहे हैं, लेकिन गुटबाजी जारी है। आने वाले दिनों में दिल्ली से कोई बड़ा ऐलान हो सकता है।
