उत्तराखंड

मसूरी वन प्रभाग से 7,375 बाउंड्री पिलर गायब केस में हाईकोर्ट ने CBI को नोटिस जारी किया, जानें अब तक क्या हुआ और IFS संजीव चतुर्वेदी की भूमिका

मसूरी वन प्रभाग से 7,375 बाउंड्री पिलर गायब केस में हाईकोर्ट ने CBI को नोटिस जारी किया, जानें अब तक क्या हुआ और IFS संजीव चतुर्वेदी की भूमिका

देहरादून, 25 दिसंबर 2025: उत्तराखंड के मसूरी वन प्रभाग से 7,375 सीमा स्तंभ (बाउंड्री पिलर) गायब होने का सनसनीखेज मामला अब उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने बुधवार को CBI, केंद्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह मामला वन भूमि पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और संभावित साजिश की ओर इशारा कर रहा है।

अब तक क्या हुआ?

2023 में खुलासा: मसूरी वन प्रभाग के वर्किंग प्लान रिवीजन के दौरान फिजिकल वेरिफिकेशन कराया गया। रिपोर्ट में पता चला कि कुल 12,321 पिलरों में से 7,375 गायब हैं (करीब 60%)। सबसे ज्यादा मसूरी रेंज (4,133) और रायपुर रेंज (1,722) से गायब, जो रियल एस्टेट के लिए आकर्षक इलाके हैं।

जून-अगस्त 2025: IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने HoFF को पत्र लिखकर SIT या CBI जांच की मांग की। आरोप लगाया कि यह लापरवाही नहीं, सुनियोजित साजिश है, जिसमें स्थानीय अधिकारी-कर्मचारी और राजनीतिक मिलीभगत शामिल हो सकती है।

केंद्र की कार्रवाई: 28 अगस्त 2025 को पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य सरकार को जांच के निर्देश दिए।

सितंबर 2025 अपडेट: दोबारा सर्वे में करीब 4,700 पिलर मिले, लेकिन सवाल बरकरार। सरकार डिजिटलाइजेशन और नए टेक-बेस्ड पिलर लगाने की योजना बना रही।

दिसंबर 2025: पर्यावरण कार्यकर्ता नरेश चौधरी की PIL पर हाईकोर्ट ने CBI सहित सभी को नोटिस जारी किया। PIL में सर्वे ऑफ इंडिया से रेफरेंस्ड सर्वे और अतिक्रमित भूमि की रिकवरी की मांग की गई है।

यह मामला लैंड माफिया द्वारा वन भूमि पर अवैध कब्जे की आशंका को बल देता है। विभाग ने आंतरिक जांच कमेटी बनाई, लेकिन आरोप हैं कि नंबर कम करने की कोशिश हो रही है।

IFS अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की भूमिका

मुख्य भूमिका: रामोन मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता और व्हिसलब्लोअर के रूप में मशहूर IFS संजीव चतुर्वेदी (तत्कालीन चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स, वर्किंग प्लान) ने ही इस मामले को उजागर किया।

उन्होंने 300+ पन्नों की रिपोर्ट तैयार की, पत्र लिखे और CBI/ED/SIT जांच की सिफारिश की।

आरोप लगाया कि DFO अमित कंवर सहित अधिकारियों की संपत्ति में असामान्य बढ़ोतरी हुई है, जिसकी जांच हो।

चतुर्वेदी भ्रष्टाचार के खिलाफ कई मामलों (जैसे कॉर्बेट पार्क, AIIMS) में मुखर रहे हैं, जिसके कारण उन्हें ट्रांसफर भी झेलने पड़े।

राज्य सरकार इसे पुराना मामला बता रही है, लेकिन कोर्ट की कार्रवाई से जांच गहराने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *