उन्नाव रेप कांड: 8 साल की इंसाफ की जंग, कुलदीप सेंगर की करतूत और पीड़िता परिवार का दर्द!
उन्नाव रेप कांड: 8 साल की इंसाफ की जंग, कुलदीप सेंगर की करतूत और पीड़िता परिवार का दर्द!
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से 2017 में सामने आया रेप कांड पूरे देश को झकझोर देने वाला था। तत्कालीन भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर एक नाबालिग लड़की का अपहरण और बलात्कार का आरोप लगा। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूख, पुलिस की निष्क्रियता और न्याय व्यवस्था की चुनौतियों का प्रतीक बन गया। 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले ने फिर पुराने घाव हरे कर दिए। आइए जानते हैं 2017 से 2025 तक की पूरी टाइमलाइन, सेंगर की करतूत, पीड़िता की संघर्ष गाथा और परिवार का दर्द।
घटना की शुरुआत (2017):
4 जून 2017: उन्नाव की 17 साल की नाबालिग लड़की नौकरी के बहाने सेंगर के घर गई, जहां उसका अपहरण कर बलात्कार किया गया। आरोप सेंगर, उसके भाई अतुल सिंह और सहयोगियों पर। परिवार ने गुमशुदगी की शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
जून-जुलाई 2017: पीड़िता मिली, लेकिन रेप की FIR में सेंगर का नाम नहीं डाला गया। परिवार को धमकियां मिलीं।
अप्रैल 2018: न्याय न मिलने पर पीड़िता ने सीएम योगी के घर के बाहर आत्मदाह की कोशिश की। इसके बाद मामला सुर्खियों में आया। पीड़िता के पिता को सेंगर के भाई ने पीटा, पुलिस हिरासत में उनकी मौत हो गई।
मामले में तेजी और कोर्ट के फैसले:
अप्रैल 2018: सीबीआई जांच शुरू, सेंगर गिरफ्तार।
जुलाई 2019: पीड़िता और परिवार पर ट्रक से हमला, दो रिश्तेदारों की मौत, पीड़िता गंभीर घायल।
अगस्त 2019: सुप्रीम कोर्ट ने केस दिल्ली ट्रांसफर किया।
16 दिसंबर 2019: दिल्ली कोर्ट ने सेंगर को रेप का दोषी ठहराया।
20 दिसंबर 2019: उम्रकैद की सजा और 25 लाख जुर्माना।
मार्च 2020: पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के लिए 10 साल की सजा।
2025 का नया मोड़:
23 दिसंबर 2025: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपील लंबित रहने तक सेंगर की उम्रकैद सस्पेंड कर सशर्त जमानत दी। शर्तें: पीड़िता के घर से 5 किमी दूर रहना, धमकी न देना, हर सोमवार पुलिस रिपोर्टिंग। हालांकि, पिता की मौत के केस में 10 साल की सजा अलग चल रही, इसलिए सेंगर अभी जेल में ही है।
पीड़िता और परिवार का दर्द:
हाईकोर्ट के फैसले से परिवार टूट गया। पीड़िता ने कहा, “यह फैसला हमारे लिए काल (मौत) है। मन किया सुसाइड कर लूं, लेकिन बच्चों और परिवार के लिए लड़ूंगी। सुप्रीम कोर्ट जाऊंगी।” उसने सुरक्षा हटाए जाने का जिक्र कर डर जताया।
बहन बोलीं, “उसने हमारे चाचा-पिता मारे, बहन के साथ यह किया। अब बाहर आएगा तो हमें जेल में डाल दो, वहां सुरक्षित रहेंगे।”
मां ने कहा, “न्याय नहीं मिला, हम सब मारे जाएंगे।” परिवार ने इंडिया गेट पर प्रदर्शन किया, पुलिस ने हटाया।
यह केस शक्तिशाली लोगों के खिलाफ न्याय की लड़ाई का प्रतीक है। पीड़िता की हिम्मत ने देश को हिलाया, लेकिन 2025 का फैसला फिर सवाल उठा रहा – क्या इंसाफ पूरा हुआ?
