ठाकरे ब्रदर्स के गठबंधन पर CM फडणवीस का तीखा तंज: ‘हाइप तो ऐसे बनाई जा रही जैसे रूस-यूक्रेन एक हो गए हों!’
ठाकरे ब्रदर्स के गठबंधन पर CM फडणवीस का तीखा तंज: ‘हाइप तो ऐसे बनाई जा रही जैसे रूस-यूक्रेन एक हो गए हों!’
मुंबई। ठाकरे चचेरे भाइयों उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के 20 साल बाद एक मंच पर आने और शिवसेना (यूबीटी)-मनसे गठबंधन की घोषणा के बाद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहली बार कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बुधवार को मंत्रालय में कैबिनेट मीटिंग के बाद पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने गठबंधन को ‘अस्तित्व बचाने की मजबूरी’ करार दिया और हाइप पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “हाइप तो ऐसे बनाई जा रही है जैसे रूस और यूक्रेन एक साथ आ गए हों… और जेलेंस्की-पुतिन बात कर रहे हों!”
फडणवीस के मुख्य बयान:
“यह विचारधारा या सोच की राजनीति नहीं, बल्कि अवसरवाद की राजनीति है। उद्धव ठाकरे ने बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना की विचारधारा को बहुत पहले दफना दिया था।”
“दोनों पार्टियां अपना राजनीतिक वजूद बचाने के लिए एकजुट हुई हैं। तुष्टीकरण की राजनीति करने से उनका वोट बैंक खिसक गया है। लोगों का उन पर भरोसा नहीं रहा।”
“यह गठबंधन मुंबई या महाराष्ट्र के लोगों को कोई फायदा नहीं देगा। महायुति का विकास कार्य देखकर जनता हमारे साथ है। बीएमसी चुनाव में महायुति की जीत पक्की है।”
फडणवीस ने राज ठाकरे पर भी निशाना साधा, कहा- “हिंदुत्व दिखाने के लिए भगवा शाल नहीं ओढ़ते।” साथ ही उद्धव को ‘निराश व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि वे बालासाहेब की विरासत को भूल चुके हैं।
गठबंधन का बैकग्राउंड:
उद्धव और राज ठाकरे ने शिवाजी पार्क में बालासाहेब को श्रद्धांजलि देने के बाद वर्ली में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। राज ने कहा, “महाराष्ट्र लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहा था। मुंबई का अगला महापौर मराठी होगा और हमारे गठबंधन से।” उद्धव ने जोड़ा, “हम हमेशा के लिए एक हो गए हैं। महाराष्ट्र का नेतृत्व सिर्फ ठाकरे कर सकते हैं।”
यह गठबंधन मुख्य रूप से 15 जनवरी 2026 को होने वाले बीएमसी और अन्य 28 नगर निगम चुनावों के लिए है। सीट शेयरिंग में यूबीटी को 145-150, मनसे को 65-70 सीटें मिलने की संभावना। मराठी वोटों को एकजुट करने की यह रणनीति महायुति (बीजेपी-शिंदे-अजित) को चुनौती देगी।
फडणवीस की यह प्रतिक्रिया महायुति के आत्मविश्वास को दिखाती है। बीएमसी पर 25 साल के शिवसेना राज के बाद अब ठाकरे ब्रांड की वापसी की कोशिश vs महायुति का विकास कार्ड – चुनावी जंग रोचक होने वाली है!
