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‘कंटिंजेंसी’ की दलील में फंसे जावेद अख्तर: ईश्वर बहस में मौलवी नदवी से दो बार पूछा मतलब, वीडियो वायरल!

‘कंटिंजेंसी’ की दलील में फंसे जावेद अख्तर: ईश्वर बहस में मौलवी नदवी से दो बार पूछा मतलब, वीडियो वायरल!

नई दिल्ली। मशहूर गीतकार और नास्तिक विचारों के लिए जाने जाने वाले जावेद अख्तर और इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी के बीच ‘Does God Exist?’ (क्या ईश्वर का अस्तित्व है?) पर हुई बहस सोशल मीडिया पर तहलका मचा रही है। दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में 20 दिसंबर को हुई इस दो घंटे की अकादमिक चर्चा में एक पल ऐसा आया जब जावेद अख्तर दार्शनिक दलील में फंसते नजर आए।

वो दलील क्या थी?

मुफ्ती शमाइल नदवी ईश्वर के अस्तित्व के पक्ष में ‘Argument from Contingency’ (कंटिंजेंसी का तर्क) दे रहे थे। यह क्लासिकल फिलॉसफिकल आर्ग्यूमेंट है, जिसमें कहा जाता है कि ब्रह्मांड की हर चीज ‘कंटिंजेंट’ (आकस्मिक या निर्भर) है – यानी उसका अस्तित्व किसी दूसरी चीज पर निर्भर है। अनंत रिग्रेस (इनफाइनाइट रिग्रेस) असंभव है, इसलिए एक ‘नेसेसरी बीइंग’ (आवश्यक सत्ता) होनी चाहिए, जो खुद पर निर्भर न हो – यानी ईश्वर।

नदवी ने अंग्रेजी में ‘Contingency’ और ‘Infinite Regress’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। जावेद अख्तर को यह समझ नहीं आया और उन्होंने एक नहीं, दो बार पूछा – “कंटिंजेंसी का मतलब क्या है?” नदवी ने समझाया कि यह किसी चीज का दूसरी पर निर्भर होना है। इस पल का वीडियो क्लिप वायरल हो गया, जहां जावेद थोड़े कंफ्यूज नजर आए।

बहस के अन्य हाइलाइट्स:

जावेद अख्तर ने इंसानी दुख-दर्द, गाजा युद्ध और बच्चों की मौत का उदाहरण देकर ईश्वर की सर्वशक्तिमान व दयालु अवधारणा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “खुदा से बेहतर तो हमारे प्रधानमंत्री हैं, कम से कम कुछ ख्याल तो रखते हैं।”

नदवी ने फ्री विल, अच्छाई-बुराई का बैलेंस और विज्ञान की सीमाएं बताकर जवाब दिए।

यह बहस लल्लनटॉप के मंच पर हुई, जिसके वीडियो को करोड़ों व्यूज मिल चुके हैं। सोशल मीडिया पर लोग दोनों के तर्कों पर बंटे हैं – कोई जावेद की भावनात्मक दलीलों को सराह रहा, तो कोई नदवी की फिलॉसफिकल गहराई को। यह चर्चा आस्था vs तर्क की पुरानी बहस को नया जीवन दे रही है!

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