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PIA की ‘हवाई शर्मिंदगी’ हुई प्राइवेट: 135 अरब में बिकी पाकिस्तान की नेशनल एयरलाइन, 1979 के विवादित विज्ञापन ने दुनिया को डराया था!

PIA की ‘हवाई शर्मिंदगी’ हुई प्राइवेट: 135 अरब में बिकी पाकिस्तान की नेशनल एयरलाइन, 1979 के विवादित विज्ञापन ने दुनिया को डराया था!

इस्लामाबाद। आर्थिक संकट से जूझते पाकिस्तान ने आखिरकार अपनी राष्ट्रीय एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) को प्राइवेट हाथों में सौंप दिया। मंगलवार को इस्लामाबाद में लाइव टेलीकास्ट ऑक्शन में आरिफ हबीब कॉर्पोरेशन लीड कंसोर्टियम ने 135 अरब रुपये (करीब 482 मिलियन डॉलर) की बोली लगाकर 75% स्टेक हासिल कर लिया। यह पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी प्राइवेटाइजेशन डील है, जो दो दशक बाद पहली बड़ी सरकारी संपत्ति की बिक्री है।

बिडिंग की पूरी कहानी:

तीन प्री-क्वालिफाइड बिडर्स – आरिफ हबीब कंसोर्टियम (फातिमा फर्टिलाइजर, सिटी स्कूल्स, लेक सिटी होल्डिंग्स के साथ), लकी सीमेंट और एयरब्लू – ने सीलबंद बोलियां जमा कीं। आरिफ हबीब ने शुरू में 115 अरब की बोली लगाई, फिर ओपन बिडिंग में लकी को पछाड़कर 135 अरब पर डील फाइनल की। सरकार ने रिजर्व प्राइस 100 अरब रखा था। इस रकम का 92.5% हिस्सा PIA में रीइन्वेस्ट होगा, जबकि 7.5% सरकार को मिलेगा। नया मालिक फ्लीट बढ़ाने और सर्विस सुधारने का वादा कर रहा है।

PIA की ‘शर्मिंदगी’ क्यों?

कभी एशिया की टॉप एयरलाइंस में शुमार PIA पिछले 20 सालों में 800 अरब रुपये का घाटा झेल चुकी है। पॉलिटिकल इंटरफेरेंस, ओवरस्टाफिंग (एक प्लेन पर 300 कर्मचारी!) और मिसमैनेजमेंट ने इसे कर्ज के बोझ तले दबा दिया। 2020 में कराची क्रैश के बाद यूरोपियन यूनियन ने बैन लगा दिया था, जो हाल ही में हटा। IMF की 7 अरब डॉलर बेलआउट की शर्त पर ही यह प्राइवेटाइजेशन हुआ। पिछले साल ब्लू वर्ल्ड सिटी की 10 अरब की बोली रिजेक्ट हो गई थी।

1979 का वो विवादित विज्ञापन:

PIA की ‘हवाई शर्मिंदगी’ का एक पुराना किस्सा 1979 का विज्ञापन है, जिसमें PIA के बोइंग 747 का साया न्यूयॉर्क के ट्विन टावर्स पर पड़ता दिखाया गया था। यह न्यूयॉर्क-पेरिस रूट प्रमोट करने के लिए था, लेकिन 9/11 अटैक के बाद यह ‘चिलिंग प्रेडिक्शन’ बन गया। हाल ही में जनवरी 2025 में पेरिस फ्लाइट्स रिज्यूम पर एक ऐड (प्लेन एफिल टावर की ओर उड़ता दिखा) ने फिर 9/11 की याद दिलाई, जिस पर पाक PM ने जांच तक कराई और PIA को माफी मांगनी पड़ी।

अब निजी मालिकों के हाथ में PIA की किस्मत सुधरेगी या नहीं, यह वक्त बताएगा। लेकिन पाकिस्तान के लिए यह आर्थिक सुधार की बड़ी जीत है!

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