उत्तराखंड

उत्तराखंड स्कूलों में गीता पाठ अनिवार्य: साधु-संतों ने किया स्वागत, सनातन संस्कृति की जीत

उत्तराखंड स्कूलों में गीता पाठ अनिवार्य: साधु-संतों ने किया स्वागत, सनातन संस्कृति की जीत

उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों में श्रीमद् भगवद गीता के श्लोकों का पाठ अनिवार्य करने के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के फैसले पर हरिद्वार सहित देवभूमि के साधु-संतों ने खुशी जताई है। 21 दिसंबर 2025 को सीएम धामी की घोषणा के बाद संतों ने इसे सनातन धर्म के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। हरिद्वार में संतों ने कहा कि धामी सरकार लगातार भारतीय संस्कृति को बढ़ावा दे रही है, और यह फैसला छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

सीएम धामी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा, “हमारी सरकार द्वारा प्रदेश के स्कूलों में गीता के श्लोकों के पाठ को अनिवार्य किया गया है। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और जीवन-दर्शन से जोड़ते हुए उनके सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है।” शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से आदेश जारी कर दिया है, जो मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों में लागू होगा। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में इसे जुलाई 2025 से शुरू हुई पहल का विस्तार बताया गया है, जहां प्रार्थना सभा में श्लोक पाठ पहले से चल रहा था।

हरिद्वार के संतों की प्रतिक्रिया जोरदार रही। अखाड़ा परिषद और विभिन्न आश्रमों के संतों ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि गीता का ज्ञान छात्रों में नैतिकता, कर्तव्यभाव और सनातन मूल्यों को जगाएगा। एक संत ने कहा, “गीता जीवन का सार है – इसमें कर्म, धर्म और मोक्ष का दर्शन है। बच्चों को यह ज्ञान मिलेगा तो समाज मजबूत बनेगा। धामी जी की सरकार देवभूमि की गरिमा बनाए रख रही है।” संतों ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप भी बताया, जो भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देती है।

यह फैसला ऐसे समय आया जब राज्य में रामायण और महाभारत को भी पाठ्यक्रम में शामिल करने की तैयारी है। सरकार का उद्देश्य शिक्षा को केवल किताबी नहीं, बल्कि संस्कारयुक्त बनाना है। हालांकि, विपक्षी दल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताया, कहते हुए कि स्कूलों में धार्मिक ग्रंथ अनिवार्य करना संविधान की भावना के विरुद्ध है।

फिर भी, साधु-संतों और समर्थकों में उत्साह है। यह कदम उत्तराखंड को सनातन संस्कृति का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसका असर स्कूलों में दिखेगा, जहां बच्चे गीता के श्लोकों से जीवन के सबक सीखेंगे।

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