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‘जी राम जी’ बिल अब बन गया कानून: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी, मनरेगा की जगह लेगा नया ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट

‘जी राम जी’ बिल अब बन गया कानून: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दी मंजूरी, मनरेगा की जगह लेगा नया ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट

नई दिल्ली, 21 दिसंबर 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी विधेयक, 2025’ (वीबी-जी राम जी बिल) को मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के साथ ही यह विधेयक अब कानून बन गया है, जो 20 साल पुरानी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेगा।

क्या है ‘जी राम जी’ बिल?

यह नया कानून ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को मजबूत करने का लक्ष्य रखता है। इसका पूरा नाम विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) है, जिसे संक्षेप में VB-G RAM G या ‘जी राम जी’ कहा जा रहा है। यह ‘विकसित भारत 2047’ विजन से जुड़ा है और मनरेगा को अपडेटेड रूप देने का दावा किया गया है। संसद के दोनों सदनों से यह बिल विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच 18 दिसंबर को पारित हुआ था।

इस कानून की खास बातें:

रोजगार के दिन बढ़े: मनरेगा में 100 दिन की गारंटी थी, अब हर ग्रामीण परिवार को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिन का अकुशल शारीरिक कार्य का रोजगार गारंटीड मिलेगा।

टिकाऊ विकास पर फोकस: काम अब जल सुरक्षा, अमृत सरोवर जैसे प्रोजेक्ट्स, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर और किसानों की आय बढ़ाने वाले कार्यों पर ज्यादा जोर। सभी एसेट्स को विकसित भारत नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर स्टैक (VB-NRIS) में जोड़ा जाएगा।

डिजिटल और पारदर्शी सिस्टम: नया पंजीकरण बायोमेट्रिक और डिजिटल आधारित होगा। भ्रष्टाचार कम करने और जवाबदेही बढ़ाने का दावा।

बजट प्रावधान: 125 दिन के विस्तार के लिए करीब 1.51 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त फंड प्रस्तावित।

राज्यों की भूमिका: राज्यों को अपनी योजनाएं बनाने और मजदूरी का कुछ हिस्सा वहन करने का प्रावधान।

विवाद क्यों?

विपक्ष, खासकर कांग्रेस, ने इसे ‘मनरेगा का अपमान’ और ‘महात्मा गांधी का नाम हटाने की सनक’ बताया। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि गांधी जी का नाम क्यों हटाया जा रहा? विपक्ष का आरोप है कि यह काला कानून है और सत्ता में आने पर इसे वापस लिया जाएगा। वहीं सरकार का कहना है कि यह पुरानी योजना को आधुनिक बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।

यह कानून लागू होने के बाद ग्रामीण भारत में रोजगार और विकास की नई दिशा तय करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा दिन रोजगार से गरीबी कम होगी, लेकिन क्रियान्वयन में पारदर्शिता चुनौती रहेगी।

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