उत्तराखंड

हरिद्वार: श्यामपुर की ब्रिटिश कालीन जेल को एडवेंचर टूरिज्म से जोड़ने की योजना

हरिद्वार: श्यामपुर की ब्रिटिश कालीन जेल को एडवेंचर टूरिज्म से जोड़ने की योजना

हरिद्वार जिले के श्यामपुर क्षेत्र में स्थित करीब 125 साल पुरानी ब्रिटिश कालीन जेल (या थाना) की खंडहर नुमा इमारत को पर्यटन विभाग एडवेंचर टूरिज्म का हिस्सा बनाने पर काम कर रहा है। यह इमारत सुल्ताना डाकू के इतिहास से जुड़ी बताई जाती है, जिन्हें भारतीय लोककथाओं में “उत्तर भारतीय रॉबिन हुड” कहा जाता है।

योजना का विवरण:

पर्यटन विभाग इस जेल को संरक्षित कर झिलमिल झील सफारी (Jhilmil Jheel Conservation Reserve) से जोड़ने की तैयारी कर रहा है।

जंगल सफारी के दौरान पर्यटक वन्यजीवों के साथ-साथ इस ऐतिहासिक स्थल का भ्रमण कर सकेंगे और सुल्ताना डाकू की कहानियां जान सकेंगे।

जिला पर्यटन विकास अधिकारी सुशील नौटियाल ने कहा: “सुल्ताना डाकू गढ़वाल-कुमाऊं में सक्रिय थे। युवा पीढ़ी ऐसे स्थलों के बारे में जानने को उत्सुक है। हम इसे एडवेंचर टूरिज्म से जोड़कर देसी-विदेशी सैलानियों को आकर्षित करेंगे।”

स्थानीय लोग लंबे समय से इसकी मांग कर रहे हैं, उनका मानना है कि इससे क्षेत्र को न सिर्फ ऐतिहासिक पहचान मिलेगी, बल्कि रोजगार और विकास भी बढ़ेगा।

सुल्ताना डाकू का संक्षिप्त इतिहास:

20वीं सदी की शुरुआत में सक्रिय सुल्ताना डाकू (असली नाम सुल्तान सिंह) हरिद्वार, बिजनौर, कोटद्वार, मुरादाबाद जैसे इलाकों में अंग्रेजों और साहूकारों के लिए खौफ थे।

लोककथाओं में उन्हें अमीरों को लूटकर गरीबों में बांटने वाला “रॉबिन हुड” माना जाता है।

बताया जाता है कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें कुछ समय श्यामपुर जेल में रखा गया (हालांकि मुख्य रूप से हल्द्वानी जेल में बंदी थे और 1924 में फांसी हुई)।

विशेष अधिकारी फ्रेडी यंग ने उन्हें पकड़ा था।

यह योजना हरिद्वार के धार्मिक पर्यटन के साथ साहसिक और ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देगी। यदि योजना सफल हुई तो यह एडवेंचर प्रेमियों के लिए नई डेस्टिनेशन बनेगी।

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