भारत ने चीन के प्रोफेशनल्स के लिए ढीले किए वीजा नियम, अमेरिकी टैरिफ से बचाव की रणनीति?
भारत ने चीन के प्रोफेशनल्स के लिए ढीले किए वीजा नियम, अमेरिकी टैरिफ से बचाव की रणनीति?
नई दिल्ली: भारत-चीन संबंधों में नरमी के नए संकेत मिले हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े टैरिफ नीतियों के बीच भारत सरकार ने चीन से आने वाले बिजनेस प्रोफेशनल्स के लिए वीजा प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने का फैसला लिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वीजा देने में लगने वाली प्रशासनिक जांच की एक परत हटा दी गई है, जिससे अब चीनी कंपनियों के कर्मचारियों को बिजनेस वीजा मात्र चार हफ्तों के अंदर मिल सकेगा। यह कदम द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है, लेकिन हर आवेदन पर सख्त केस-बाय-केस जांच जारी रहेगी।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति का हिस्सा है, जो अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के बीच चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है। ट्रंप प्रशासन के 100% तक के टैरिफ से भारतीय निर्यात पर दबाव बढ़ा है, इसलिए चीन से निवेश और तकनीकी सहयोग को आसान बनाना जरूरी हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीनी विशेषज्ञों की आमद बढ़ेगी, जो भारत की ‘मेक इन इंडिया’ को बूस्ट देगी।
यह फैसला हाल के अन्य कदमों का विस्तार है। नवंबर 2025 में चार साल के निलंबन के बाद चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर शुरू किए गए थे, जो गलवान घाटी संघर्ष (2020) के बाद बंद हो गए थे। अक्टूबर 2024 में LAC पर डिसइंगेजमेंट और कजान में मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात ने रिश्तों को पटरी पर लाने में मदद की। साथ ही, अक्टूबर 2025 से सीधी उड़ानें बहाल हुईं और कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू हुई। चीन ने भी जवाब में भारतीयों के लिए ऑनलाइन वीजा सुविधा 22 दिसंबर से शुरू करने की घोषणा की है।
हालांकि, सुरक्षा चिंताओं के बीच यह ढील सीमित है। एनडीटीवी के सूत्रों ने पुष्टि की कि वीजा सकारात्मक दृष्टिकोण से दिए जा रहे हैं, लेकिन गहन स्क्रूटनी बरकरार है। क्या यह ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ का नया दौर है? या महज आर्थिक मजबूरी? आने वाले महीने बताएंगे, लेकिन भारत की यह चाल वैश्विक व्यापार युद्ध में स्मार्ट मूव लग रही है।
