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टेस्ला की बिक्री पर ब्रेक लगी! 4 सालों में सबसे बुरी गिरावट, भारत में महज 600 कारें बिकीं

टेस्ला की बिक्री पर ब्रेक लगी! 4 सालों में सबसे बुरी गिरावट, भारत में महज 600 कारें बिकीं

नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक वाहन जगत की दिग्गज कंपनी टेस्ला इन दिनों मंदी के साये तले त्रस्त है। ग्लोबल सेल्स में 13% की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो 2022 के बाद सबसे खराब आंकड़ा है। अमेरिका में नवंबर 2025 में बिक्री 23% लुढ़ककर 39,800 यूनिट पर सिमट गई, जबकि पहले क्वार्टर में डिलीवरी 13% घटी। एलन मस्क की अगुवाई वाली यह कंपनी प्रतिस्पर्धा, ऊंची कीमतों और मस्क के राजनीतिक विवादों से जूझ रही है। शेयर प्राइस में 45% की कमी आई है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

भारत में स्थिति और भी निराशाजनक है। जुलाई 2025 में मुंबई में पहला शोरूम खोलने के बाद से अब तक सिर्फ करीब 600 कारें बिकी हैं—जिनमें ज्यादातर मॉडल वाई हैं। अक्टूबर में तो महज 40 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो सितंबर से 37.5% कम है। मॉडल वाई की शुरुआती कीमत 59.89 लाख रुपये है, जो लग्जरी सेगमेंट में मर्सिडीज-बीएमडब्ल्यू (4,000 यूनिट्स बिकीं) से पीछे छोड़ रही है। उच्च आयात शुल्क (100% तक) और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी बाधा बन रही है।

टेस्ला ने गुरुग्राम में सबसे बड़ा सेंटर खोला है, जहां ईंधन-रखरखाव पर 20 लाख रुपये की बचत का दावा किया जा रहा है। कंपनी सस्ते वेरिएंट लॉन्च कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि लोकल मैन्युफैक्चरिंग के बिना मुश्किल। भारत का ईवी मार्केट 20% बढ़ा है, लेकिन टेस्ला का शेयर महज 2.5% है। क्या मस्क का ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडा भारत को नजरअंदाज कर रहा है? आने वाले महीने बताएंगे। कुल मिलाकर, टेस्ला को रणनीति बदलनी होगी वरना गिरावट रुकेगी नहीं।

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